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ट्रक के ऊपर बैठे श्रमिक की डाल से टकराकर मौत

Sat, 09 Jan 2016 10:42 PM IST
पुवायां।
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ट्रक के टूल में बैठे कांट थाने के गांव चक ममरेजपुर निवासी श्रमिक 21 वर्षीय रामू की पेड़ की डाल से टकराकर मौत हो गई। सूचना घर पहुंची तो रोते बिलखते परिवार के लोग मौके पर पहुंच गए। हादसे से मृतक के घर मातम छाया है।
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मूल रूप से कस्बा मिर्जापुर निवासी रामू अपने परिवार के साथ दो वर्ष से नाना सुंदरलाल के यहां चक ममरेजपुर में आकर रहने लगा था। वह गांव के दस अन्य श्रमिकों के साथ ट्रक पर भूसी भरने का काम करता था। शनिवार को ट्रक चालक मोहम्मद हसन शाहजहांपुर के केआर पल्प मिल से भूसी लेने के लिए पुवायां आ रहा था। रामू ट्रक के ऊपर टूल में बैठा था और अन्य श्रमिक नीचे बैठे थे। बड़ागांव में पीपल के पेड़ की डाल रामू से टकरा गई। साथी श्रमिकों ने यह देखकर ट्रक रुकवाया और बेहोश हो चुके रामू को नीचे उतारा। इसके बाद उसे पुवायां के सरकारी अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जानकारी पाकर मृतक के पिता बहोरन लाल, मां मुन्नी देवी, नाना सुंदरलाल, नानी और मामा अनिल कुमार रोते बिलखते अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भिजवाया। मृतक अपने पिता की सबसे बड़ी संतान था और उसकी कमाई से ही घर का खर्च चलता था। वह अपने पीछे पांच बहन और दो भाई छोड़ गया है। रामू की मौत से परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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पुलिस के सामने से गुजरते हैं ओवरहाइट ट्रक
पुवायां। पुलिस की शह पर बेहद तेज रफ्तार से तमाम डग्गामार वाहन सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं, इसके अलावा गन्ना और भूसी भरे ओवरलोड, ओवरहाइट ट्रक भी धड़ल्ले से चल रहे हैं। नियम, कानून के नाम पर बाइक का चालान तो किया जाता है, लेकिन मौत के दूत बने इन ट्रकों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
पुवायां के मुख्य चौराहे राजीव चौक पर पूरे दिन पुलिस तैनात रहती है। यहां अक्सर वाहन चेकिंग भी की जाती है, लेकिन चेकिंग के दौरान डग्गामार वाहन, भूसी और गन्ने से भरे ट्रक पुलिस को नजर ही नहीं आते हैं। चेकिंग में पुलिस को केवल बाइक सवार यातायात नियमों को उल्लंघन करते दिखते हैं और कागजों में मामूली गलती, कागज भूल जाने पर पुलिस चालान करने में देर नहीं लगाती है।
भूसी और गन्ने से भरे ट्रकों के चालक रोड पर पेड़ की शाखाओं को बचाने के फेर में रोड के बीचोबीच चलते हैं। पेड़ की डाल बचाने के फेर में ट्रकों के चालक सामने से आ रहे वाहन को साइड नहीं देते हैं और ऐसे ट्रकों को ओवरटेक करना भी टेढ़ी खीर है। भूसी भरे ट्रक के चालकों का पूरा ध्यान भूसी के ऊपर तने तरपाल को पेड़ की डाल से टकराकर फटने से बचाने पर रहता है, ऐसे में अक्सर हादसे हो जाते हैं और लोग जान से हाथ धो बैठते हैं। ऐसे ट्रकों को रोके नहीं जाने के पीछे भी वजह है। गन्ना भरे ट्रकों को चलवाने वाले कई ठेकेदार पहले से ही पुलिस और परिवहन विभाग के जिम्मेदार लोगों से सांठगांठ कर लेते हैं और हर महीने निश्चित रकम देकर धड़ल्ले से ट्रक चलवाते हैं, वहीं भूसी भरे ट्रकों के चालक हर चौराहे पर पुलिस को निश्चित राशि देकर आगे की ओर निकल जाते हैं। ऐसे में यदि कोई दुर्घटना होती है तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। ऐसा ही शनिवार को भी हुआ। यदि पुलिस ने शाहजहांपुर, सिंधौली में ट्रक रोककर श्रमिक को ट्रक के ऊपर से उतार दिया होता तो रामू की जान बच सकती थी।
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