नगर क्षेत्र में किराए के भवनों में संचालित हो रहे परिषदीय विद्यालयों में
से 11 विद्यालयों में शौचालय नहीं हैं। इन विद्यालयों में पढ़ रहीं करीब
साढ़े सात सौ छात्र-छात्राएं आखिर शौच के लिए कहां जाएं यह दिक्कत विद्यालय
स्टॉफ को भी सता रही है। इसकी जानकारी शिक्षा अधिकारियों को दिए जाने के
बावजूद इस दिशा में कोई कार्य नहीं हो पा रहा है, जबकि शासन स्तर से सभी
विद्यालयों में शौचालय को अनिवार्य कर दिया गया है।
नगर क्षेत्र में 61
परिषदीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें 10 विद्यालयों में शौचालय ही
नहीं है। यह सारे विद्यालय किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं, जिससे
इनमें शौचालय बनवाने के लिए भवन स्वामी तैयार नहीं होते हैं। इस वजह से न
सिर्फ छात्र-छात्राओं को परेशानी होती है, बल्कि विद्यालय स्टॉफ को इस
दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
विद्यालय स्टॉफ का कहना है कि इसकी
जानकारी विभागीय अधिकारियों को दी जा चुकी है। वहां से निर्देश मिलने और
मकान मालिकों की सहमति मिलने के बाद ही कुछ किया जा सकता है। शौचालय विहीन
विद्यालयों की सूची में प्राथमिक विद्यालय घूरनतलैया, भारद्वाजी द्वितीय,
सिंजई, मतानी, रंगीन चौपाल, तारीन टिकली प्रथम, अलीजई, हाथीथान प्रथम,
अजीजगंज प्रथम एवं द्वितीय एवं बाबूजई द्वितीय शामिल हैं।
‘शहर
में किराए के भवनों में संचालित हो रहे विद्यालयों के भवन स्वामियों से
शौचालय निर्माण के लिए उनकी सहमति लेनी है। इसके लिए भवन स्वामियों की बैठक
मंगलवार को करेंगे। भवन स्वामियों शौचालय सहमति लेकर शौचालय निर्माण कराया
जाएगा।Ó
-मुन्नालाल त्रिवेदी, नगर शिक्षा अधिकारी