पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण अस्पष्ट होने पर विसरा जांच के लिए रख लिया जाता है। जरूरत पड़ने पर कोर्ट के आदेश पर विसरा की जांच कराई जाती है। पुलिस लाइंस के अस्पताल में करीब साढ़े चार सौ विसरा जांच के लिए रखे हुए हैं। इनमें से काफी तो कई साल पुराने हो गए हैं। कुछ की हालत ऐसी हो गई है कि शायद ही जांच बाद उनसे कोई रिजल्ट मिल सके।
संदिग्ध हालात में मौत या फिर मौत का कारण स्पष्ट न होने पर शव के पोस्टमार्टम के बाद विसरा जांच के लिए सुरक्षित रख लिया जाता है। अगर कोर्ट में कोई विसरा जांच कराने की मांग करता है तो विसरा जांच के लिए लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाता है। विसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होती है, लेकिन ऐसा बहुत कम मामलों में ही होता है।
करीब 450 विसरा जांच के लिए रखे
पुलिस लाइंस अस्पताल में करीब साढ़े चार सौ विसरा जांच के लिए रखे हैं। इनमें से कई तो ऐसे है जो कई साल पुराने हो चुके हैं। इन्हें पुलिस लाइंस में बने एक कमरे में अलमारियों में शीशे के पॉट में बंद करके रखा गया है।
क्या होता है विसरा
विसरा में मृतक के गुर्दे का कुछ हिस्सा, किडनी का कुछ हिस्सा, आंत का कुछ हिस्सा और पेट की थैली रखी जाती है। इन्हें नमक के संतृप्त घोल में शीशे के पॉट में शील करके रखा जाता है। अस्पताल के कर्मचारी लगातार इनकी देखभाल करते रहते हैं।
कोर्ट के आदेश पर ही कोई विसरा जांच के लिए भेजा जाता है। अगर कोर्ट आदेश करेगी तभी विसरा नष्ट किया जा सकता है। इसकी पुष्टि करना मुश्किल है कि विसरा कितने दिनों में खराब हो जाता है।
- डॉ. ओपी गौतम, प्रभारी पुलिस लाइंस अस्पताल