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ट्रेन चोर गिरोह का सरगना गिरफ्तार

Sun, 03 Jan 2016 11:01 PM IST
शाहजहांपुर।
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 ट्रेनों में यात्रियों के सूटकेस, बैग आदि से चुराए गए जेवरों को बेचने के लिए शाहजहांपुर में एक सर्राफा कारोबारी के यहां जा रहे बरेली के फरीदपुर निवासी अंतरराज्यीय गिरोह पर जीआरपी टीम ने रविवार की सुबह धावा बोला। इसमें गिरोह का सरगना रवि यादव शाहजहांपुर स्टेशन पर छोटी लाइन के पास दबोच लिया गया, जबकि इसके दो साथी विष्णु और कल्लू चकमा देकर भाग निकले। वे दोनों फरीदपुर के ततारपुर के रहने वाले हैं। रवि के पास से करीब 50 हजार रुपये से कुछ अधिक मूल्य के जेवर बरामद हुए हैं। ये जेवर इस गिरोह ने गत 21 दिसंबर को बीसलपुर से निगोही रेलवे स्टेशन के बीच पीलीभीत निवासी सुधीर कौशल की पत्नी के बैग से चुराया था। इस बारे में पीलीभीत जीआरपी में केस दर्ज है। पूछताछ में सरगना ने गत डेढ़ साल में विभिन्न रेल रूट पर ट्रेनों में 100 से अधिक चोरियां करने की बात कबूली है।
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यह गिरोह उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी ट्रेनों में चोरियां करता रहा है। इसके पकड़ में आने के मूल में पीलीभीत जीआरपी द्वारा दर्ज चोरी की एफआईआर रही। उस पर एडीजे रेलवे मुकुल गोयल के निर्देश पर एसपी (राजकीय रेलवे पुलिस, लखनऊ) नेहा पांडेय की अगुवाई में बरेली के फरीदपुर में गत दिनों प्रकाश में आए चोर गिरोहों की गतिविधियों पर सर्विलांस से निगरानी शुरू की गई है। शाहजहांपुर जीआरपी थाना प्रभारी जयशंकर सिंह के नेतृत्व वाली टीम ने रवि यादव और उसके साथियों का घटना के समय का लोकेशन घटनास्थल के आसपास मिली तो मुखबिरों को इसके पीछे लगाया गया। रविवार सुबह यहां पकड़े जाने पर रवि यादव ने बताया कि बीते डेढ़ साल में इसने अपने साथियों के साथ लखनऊ-गोंडा, इलाहाबाद-कानपुर, अलीगढ़ और बरेली आसपास के रेल रूट पर ट्रेनों में 100 से अधिक चोरियां कीं और पकड़ा नहीं गया। करीब 95 फीसदी मामलों में तो शिकायत ही दर्ज नहीं हुई, जिसके चलते पुलिस की निगाह में आने से बचा रहा। गोंडा-बहराइच रूट पर भी इसने एक दर्जन से अधिक चोरियों की बात कबूली है। बताया कि माह भर पहले भी इसने पीलीभीत के बीसलपुर में ट्रेन में एक यात्री के बैग से जेवरात और बरेली सिटी से भोजीपुरा के बीच गत 23-24 दिसंबर को इसने लालकुआं एक्सप्रेस में दो यात्रियों के बैग से चोरी की।
जीआरपी के एसओ जयशंकर सिंह ने बताया कि महज 26 साल की उम्र का यह शातिर चोर सरगना अब से पहले तीन बार जोधपुर, एटा और बरेली में पुलिस द्वारा पकड़ा गया एवं जेल की सजा काटकर छूटते ही फिर से चोरी में जुट गया। यह बरेली के फरीदपुर थाना क्षेत्र के शांति नगर का निवासी है। इसे पकड़ने वाली टीम में शाहजहांपुर जीआरपी के एसआई चंद्र प्रताप सिंह, कांस्टेबल विजय प्रताप सिंह, अरविंद कुमार, विजय सिंह और ओमवीर सिंह शामिल थे।
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गर्लफ्रेंड के चक्कर में बन गया शातिर चोर
शाहजहांपुर। ट्रेनों में चोरी के आतंक का पर्याय बना रवि यादव ने अपराध की दुनिया में 17 साल की उम्र में कदम रखा। इसके पिता विनोद का इसके छुटपन में ही स्वर्गवास हो गया। इसकी मां लता ने दूसरी शादी कर ली और फरीदपुर में ही आटो चलाने वाले राम बहादुर की पत्नी बनकर अपने बच्चों के साथ रहने लगी। उसी क्रम में रवि अपने मामा आशाराम के पास एटा चला गया। वहां कुछ दिनों आरकेस्ट्रा में भी काम किया और बाद में इलेक्ट्रिक लाइटिंग डिजाइन का कारीगर बन गया। तब यह बालिग नहीं था और गिफ्ट देकर परिचित परिवार की लड़की विनीता से प्रेम संबंध बनाए।
उसने गर्लफ्रेंड को ही पत्नी बनाना तय किया, क्योंकि वह अपने मां-बाप की इकलौती संतान थी और परिवार के पास 17 बीघे खेती थी। उस गर्लफ्रेंड के नित निए गिफ्ट की डिमांड यह अपनी कारीगरी की कमाई से पूरी नहीं कर पा रहा था। ऐसे में इसने शातिर अटैची चोर गिरोह सरगना हृदेश वर्मा की शागिर्दी हासिल की। उस गिरोह में इसने अटैची, बैग आदि काटकर चोरी करना सीखा। उसी गिरोह के सदस्य के रूप में पहली बार यह वर्ष 2009 में राजस्थान के जोधपुर के मेहता रोज थाना की पुलिस द्वारा पकड़ा गया। तब यह नौ माह जेल में रहा और बाहर आते ही इसने अपना नया गिरोह बना लिया एवं उसमें राकेश, नीरज जाटव आदि को शामिल किया। फिर इसे एटा में एसओजी ने पकड़कर जेल भेजा। फिर छूटने पर यह अपनी गर्लफ्रेंड को लेकर पहचान बदलकर फरीदपुर आकर रहने लगा। यहीं दोनों ने शादी कर ली और बच्चा होने के बाद विनीता को पता चला कि उसके पति का धंधा चोरी का है। यहां रवि ने फिर नया गिरोह बनाया और उसमें सतेंद्र, रामचरण, सुधीर आदि को शामिल कर अंतरराज्यीय रेल रूट पर ट्रेनों में हाथ साफ करना शुरू किया। फिर यह वर्ष 2013-14 में बरेली जीआरपी के हत्थे चढ़ा और छह माह बाद जेल से छूटा। उसके बाद अब शाहजहांपुर जीआरपी की पकड़ में आया।
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चोरी का माल खपाती है सरगना की मां
शाहजहांपुर। शातिर चोर रवि की मां लता ने अपराधियों की दुनिया में अपना नाम लता मंगेशकर रखा है। वह अपने बेटे और अन्य चोर गिरोहों द्वारा यात्रियों से चुराए गए जेवरात और कीमती सामानों को खुले बाजार में खपाने में बिचौलिया की भूमिका निभाती है। पुलिस वाले इसे चोरों की नेताइन के नाम से जानते हैं। यही पुलिस को गाहे-बगाहे हुई चोरी और उसमें लिप्त रहे चोरों की जानकारी भी देकर अपने बेटे के गिरोह को पुलिस के नजर में नहीं आने देती। जीआरपी एसओ जयशंकर सिंह ने इसकी पुष्टि की।
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