बाघ एक्सप्रेस में शनिवार की रात हुई लूट की वारदात के मामले में जीआरपी को बदमाशों के कोई सुराग नहीं मिले हैं। इससे पहले भी डेढ़ साल पहले सद्भावना एक्सप्रेस लूट के प्रयास के मामले में रेलवे पुलिस ने लीपापोती करके एफआर लगा दी है। ट्रेन में लूट की वारदातों को पुलिस हमेशा क्षेत्राधिकार में उलझाए रखती है। इसके बाद अंतिम रिपोर्ट प्रेषित करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल देती है।
लखनऊ से काठगोदाम जा रही बाघ एक्सप्रेस में शनिवार की रात दर्जन भर बदमाशों ने आंझी शाहबाद-टोडरपुर के बीच जमकर लूटपाट की बदमाश नगदी, जेवर मोबाइल समेत लाखों का सामान लूट ले गए थे। विरोध करने पर बदमाशों ने यात्रियोें की पिटाई भी की थी। मामले में हरदोई, शाहजहांपुर और बरेली की जीआरपी को अलर्ट किया गया, लेकिन तीसरे दिन भी बदमाशों का कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। बाघ एक्सप्रेस मे हुयी लूट का मामला भी इसी पेंच में फंसता नजर आ रहा है। रेलवे और सिविल पुलिस दोनों ही बदमाशों को पकड़ने के बजाए मामले को टरकाने के प्रयास में लगे हुए हैं।
लूट के प्रयास की घटना में लगा दी एफआर
बता दें कि एक अगस्त 2013 को रोजा और राम प्रसाद बिस्मिल नगर रेलवे स्टेशन के बीच बदमाशों सद्भावना एक्सप्रेस को रोक लिया था। बदमाशों ने जनरल बोगी में लूटपाट का प्रयास किया था। स्कार्ट ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ के जवानों ने बदमाशों मुचैटा लिया। दोनों के बीच जमकर फायरिंग हुई थी। बदमाश लूट करने में नाकाम रहे थे। इस मामले में आरपीएफ के जवानों ने शाहजहांपुर के थाना जीआरपी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पहले तो जीआरपी इस मामले को रोजा जीआरपी का क्षेत्राधिकार बताकर मामले को टरकाने का प्रयास किया था। रोजा जीआरपी ने मामले को यह कहकर टरका दिया कि मामला रेलवे क्षेत्राधिकार का है। छह महीने तक फाइन इधर से उधर घूमती रही। इसके बाद फाइल को बंद कर दिया गया।