आसाराम के खिलाफ दुष्कर्म मामले में पीड़िता की तरफ से मुख्य गवाह कृपाल सिंह को गोली मारे जाने के बाद से पीड़िता का परिवार भी खौफजदा है। पीड़िता के पिता ने कहा कि आसाराम के गुर्गों ने ही गोली मारी है। आसाराम धीरे-धीरे करके सारे गवाहों को खत्म कराना चाहते हैं।
कृपाल को गोली लगने से पीड़िता के पिता को बड़ा आघात लगा है। कृपाल मामले में मुख्य गवाह था। कृपाल की हालत गंभीर होने पर उन्हें बरेली रेफर कर दिया गया है। पीड़िता के पिता कृपाल के साथ एंबुलेंस में बैठकर बरेली गए। उनका कहना है कि आसाराम अपने गुर्गों से गवाहों पर हमले कराकर डर पैदा करना चाहता है। आसाराम के लोग पीड़िता के पिता और गवाहों को लगातार धमकी दे रहे हैं।
कृपाल की पत्नी हुई बेसुध
कृपाल पर हमले की खबर लगते ही उनकी पत्नी नीरज भी बदहवास हालत में जिला अस्पताल पहुंच र्गइं। वह अपने पति से बात करना चाहती थी, लेकिन कृपाल बेहोश थे। कृपाल की हालत देखकर नीरज बेसुध हो र्गइं। कृपाल को बरेली रेफर किए जाने की खबर सुनकर बेहद घबरा भी गईं।
इससे पहले भी गवाहों पर हुए हैं कातिलाना हमले
शाहजहांपुर। नाबालिग से दुराचार के आरोपी आसाराम के खिलाफ गवाही देने वालों पर हमला होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई अहम गवाहों पर कातिलाना हमले हो चुके हैं, इनमें कुछ की मौत भी हो चुकी है, जबकि कुछ जीवन और मौत के बीच अभी संघर्ष कर रहे हैं।
जोधपुर के छिंदवाड़ा गुरुकुल आश्रम में पढ़ रही शहर की बिटिया ने आसाराम पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। यह घटना 15 अगस्त 2013 की रात की बताई जा रही है। बाद में पीड़िता ने अपनी मां को पूरी बात बताई, इसके बाद बिटिया के पिता ने आसाराम के खिलाफ 19 अगस्त 2013 को नाबालिग बेटी से दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज करा दी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जोधपुर पुलिस ने बमुश्किल आरोपी आसाराम को 30 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया।
आसाराम की गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ गवाही देने वाले आसाराम के पूर्व वैद्य अमृत प्रजापति पर कातिलाना हमला किया गया, जिसमें उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। पीड़िता के पिता ने बताया कि अमृत प्रजापति अहम गवाह था, जिसे आसाराम ने मरवा दिया। इसके बाद एक अन्य गवाह अखिल गुप्ता, महेंद्र चावला, राहुल सचान समेत कई अन्य गवाहों को भी रास्ते से हटाने के लिए कातिलाना हमला किया गया, ताकि केस कमजोर किया जा सके। राहुल सचान तो जोधपुर कोर्ट में गवाही देकर लौट रहे थे, कि दिन दहाड़े उनपर कोर्ट से निकलते ही चाकुओं से हमला कर दिया गया। महेंद्र चावला भी लगातार अपनी जान को खतरा बता रहे थे, उन्हें लगातार धमकियां भी मिल रहीं थीं, इसी बीच उन पर पिछले कुछ दिन पहले ही हमला किया गया।
पीड़ित परिवार को अब तो दे दीजिए शस्त्र लाइसेंस
शाहजहांपुर। गंभीर अपराधों से पीड़ित लोगों को सुरक्षा देने में पुलिस और प्रशासन के आला अफसर कतई गंभीर नहीं हैं। आम लोगों के लिए शस्त्र लाइसेंस पाना वैसे ही टेढ़ी खीर है। हाई प्रोफाइल आसाराम प्रकरण में पीड़ित शहर बिटिया के परिवार को भी आवेदन के डेढ़ साल बीतने पर भी लाइसेंस नहीं मिला। यही वजह है कि आसाराम के खिलाफ गवाही देने वाले कृपाल सिंह को गोली मार दिए जाने की खबर सुनकर पीड़ित परिवार फिर अपनी सुरक्षा को लेकर सिहर उठा।
लाइसेंस के लिए किसी ने नहीं की सुनवाई
इस संबंध में पीड़िता के पिता का कहना कि उन्होंने नवंबर-दिसंबर 2013 में अपने लिए रिवाल्वर तथा बेटे के लिए रायफल के लिए शस्त्र लाइसेंस की मांग की थी। पुलिस और एलआईयू की जांच रिपोर्ट लगने के बाद फाइल डीएम कार्यालय में पहुंच चुकी है। आसाराम संबंधी मुकदमेबाजी के चक्कर में दौड़-धूप नहीं कर पाए, इसलिए कुछ हुआ नहीं। एक बार तत्कालीन डीएम राजमणि यादव ने लाइसेंस की फाइल तलब की, लेकिन उसी बीच चुनाव आड़े आ गए और बाद में उनका ट्रांसफर हो गया। फिर किसी ने सुना ही नहीं। वैसे एसपी ने इस परिवार की सुरक्षा के लिए दो गनर मुहैया कराए हुए हैं, जो नाकाफी हैं।
पुलिस जांच में अटके हैं आवेदन
शस्त्र लाइसेंस के अब तक जितने नए आवेदन प्राप्त हुए, वे सत्यापन के लिए एसपी के पास पुलिस कार्यालय भेजे गए हैं। हालांकि, अफसर अभी यह नहीं बता पा रहे कि पीड़ित परिवार के आवेदन की क्या स्थिति है अथवा गोली से गंभीर जख्मी हुए कृपाल ने शस्त्र के लिए आवेदन किया था या नहीं। एडीएम प्रशासन मुनेंद्र नाथ उपाध्याय ने बताया कि एक शासनादेश के अनुसार अब शस्त्र लाइसेंस आवेदकों को कई अन्य जांच से गुजरना होगा जिनमें निशाना साधने की क्षमता भी शामिल है। इसके लिए पुलिसलाइन में फायरिंग रेंज तैयार कर ली गई है। इसके लिए नए आवेदन पुलिस के पास भेजे गए है और हो सकता है उनमें आसाराम से पीड़ित परिवार की फाइल भी हो।