मंगलवार रात एक युवक की संदिग्ध हालत में झुलसकर मौत हो गई। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और शव पोस्टमार्टम को भिजवाया। युवक की मौत पर गांव में तमाम तरह की चर्चाएं हैं। गांव रौतापुर कलां निवासी 35 वर्षीय रविकांत वर्मा घर में पत्नी नीलू वर्मा और दो बच्चों 12 वर्षीय पुत्री प्रियांशी, आठ वर्षीय पुत्र प्रेरित के साथ रहता था। नीलू वर्मा का कहना है कि उसके पति शराब के आदी थे। मंगलवार सुबह से वह घर से कहीं चले गए थे। शाम को रविकांत घर लौटे तो शराब के नशे में थे। रात में उसने पति को शराब पीने पर उलाहना दिया तो वह दूसरे कमरे में जाकर लेट गए। रात लगभग 11 बजे पति की चीखों की आवाज सुनकर वह उठी तो कमरे में पति को आग की लपटों में घिरा देखा। उसने शोर मचाया पर आग की भयावहता देखकर वह पति के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सकी। कुछ ही देर में रविकांत की मौत हो गई। इसके बाद वह डरकर गांव में ही एक डेयरी पर चली गई। सूचना पाकर पुलिस रात में ही मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भिजवाया। सुबह रविकांत के बहनोई खीरी के गोला कस्बा निवासी हरिओम और बहन विमला वर्मा मौके पर पहुंचे। रविकांत के पिता और मां की पहले ही मौत हो चुकी है। वह तीन बहनों में इकलौता भाई था और उसके पास कई एकड़ जमीन भी थी। एसओ इफ्तेखार अहमद ने बताया कि सूचना पर रविकांत का शव पोस्टमार्टम को भेजा गया है। अभी किसी ने तहरीर नहीं दी है। तहरीर मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
पत्नी के बयान और मौके के हालात जुदा
खुटार। रविकांत की पत्नी नीलू वर्मा का कहना है कि आग लगने के बाद उसके पति ने शोर मचाया। हालांकि जिस कमरे में रविकांत का शव मिला, उसकी स्थिति देखकर लगता है कि रविकांत ने जलने के दौरान भागने का प्रयास नहीं किया। आग से कमरे में रखा बिस्तर, कुर्सियां आदि जली हैं, लेकिन यह सामान रविकांत के पास ही रखा था।
बहन के नाम किया था जमीन का इकरारनामा
खुटार। रविकांत वर्मा ने वर्ष 2014 में लगभग दो एकड़ जमीन गांव के ही किसी व्यक्ति को बेच दी। इस जमीन पर मुकदमा चल रहा है। इसके बाद रविकांत के पास कुल 6.16 एकड़ जमीन बची थी। 16 फरवरी 2015 को रविकांत ने अपनी कुल जमीन का इकरारनामा बहन विमला देवी के नाम 2.5 लाख रुपये में कर दिया था। रविकांत ने इकरारनामे के समय एक लाख रुपये भी लिए थे। इकरारनामे की मियाद 16 जुलाई 2015 को समाप्त हो चुकी है।