गांव रौतापुर कलां में बुधवार रात सौतेले भाईयों सेठलाल और रमेश मिश्रा के परिवार के लोग आपस में भिड़ गए। दोनों तरफ से जमकर लाठी डंडे चले और 12 लोग घायल हो गए। सूचना पर देर से पहुंची पुलिस ने सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया। खूनी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल किशोर की बरेली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
एक पक्ष से सेठलाल के पुत्र अवनीश कुमार ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि बुधवार रात को गांव की सहकारी समिति में सेल्समैन रमेश मिश्रा के परिवार के अमित और नीरज शराब पीकर उसके घर के सामने गाली गलौज कर रहे थे। उसके भाई मुनीश ने विरोध किया तो दोनों ने मारपीट शुरू कर दी। शोर मचाया तो जान से मारने की धमकी देकर चले गए। मुनीश भागकर घर में घुस गया। कुछ देर बाद अमित, नीरज, सचिन, नितिन और चार अन्य लोगों ने उसके दरवाजे पर आकर फिर गाली गलौज शुरू कर दी। दरवाजा नहीं खोला तो कुल्हाड़ी से दरवाजा चीर दिया और घर में घुसकर परिवार के लोगों से मारपीट और तोड़फोड़ शुरू कर दी। आरोपियों ने मुनीश, उसके पुत्र प्रवीण, नवीन, पिता सेठलाल, मां जयदेवी, पत्नी गीता देवी और बहन रन्ना देवी को लाठियों से पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। वहीं दूसरी ओर से रामप्रकाश ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि मुनीश, सेठलाल, नवीन और अवनीश गाली गलौज कर रहे थे, जब उसने विरोध किया तो वह लोग मारपीट करने लगे। बचाने आए भाई रमेश मिश्रा, भतीजे अमित, नीरज और पुत्र सचिन, नितिन को भी पीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। काफी देर बाद गांव पहुंची पुलिस घायलों को सरकारी अस्पताल ले गई। जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। प्रवीण की हालत बिगड़ने पर उसे बरेली के निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान बृहस्पतिवार सुबह उसकी मौत हो गई।
पुलिस की लापरवाही ने ले ली प्रवीण की जान
खुटार। अधिकारियों के कड़े निर्देश हैं कि थाने आने वाली हर सूचना को गंभीरता से लेकर कार्रवाई की जाए, लेकिन खुटार पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर ध्यान नहीं दे रही। कई अन्य मामलों की तरह गांव रौतापुर कलां में हुए विवाद में भी पुलिस ने लाठी डंडे चलने की सूचना को बेहद हल्के में लिया और पांच किमी दूर गांव पहुंचने में एक घंटा से अधिक समय लगा दिया। तब तक दोनों पक्षों में लाठी डंडे चलते रहे, जिससे प्रवीण की जान चली गई। गांव रौतापुर कलां निवासी सेठलाल और रमेश सौतेले भाई हैं। दोनों परिवारों में काफी समय से 36 का आंकड़ा चल रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि यदि पुलिस मामले को गंभीरता से लेकर जल्दी गांव पहुंच जाती तो मारपीट की घटना को रोका जा सकता था और प्रवीण की जान बच सकती थी। एसओ जसवीर सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर गई और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराने के साथ ही रिपोर्ट भी दर्ज की। प्रवीण की मौत के बाद मुकदमे में धाराएं बढ़ाई जा रही हैं।