थाना सेहरामऊ दक्षिणी के पसगवां में डेरा डालकर पठान गैंग रह रहा था। इससे पहले यह गैंग हिमाचल प्रदेश के मनाली स्टेशन के आसपास डेरा डालकर रहता था। एक साल से गैंग के सदस्य अपने परिवारों के साथ पसगवां में डेरा जमाए थे। सितंबर में गैंग के पांच सदस्यों के पकड़े जाने के बाद परिवार की महिलाएं और बच्चे कहीं गायब हो गए। पुलिस रिकार्ड में गैंग का कोई स्थाई पता नहीं है। महिलाओं और बच्चों को छोड़कर गिरोह के पुरुष सदस्य अक्सर गांव के बाहर रहकर वारदातों को अंजाम देते थे। पसगवां गांव के कुछ दबंगों का गिरोह को संरक्षण प्राप्त था। जेल से रिहा हुए असलम की खुफिया पुलिस लगातार मॉनीटरिंग कर रही है।
पसगवां में एक साल पहले पठान गैंग ने डेरा डाला था। कुछ दिनों बाद ही गांव के कुछ दबंगों का गैंग के सदस्यों को संरक्षण प्राप्त हो गया था। गिरोह का सरगना पठान उर्फ खान, मेहरान उर्फ दीवान और सोनू उर्फ फौलाद के परिवार की महिलाएं और बच्चे डेरे में रहते थे। थाना गढ़िया रंगीन क्षेत्र के गांव डभौरा निवासी इमरान उर्फ इरफान उर्फ भिखारी और थाना सिरौली (बरेली) क्षेत्र के गांव व्यास निवासी असलम उर्फ सैफ अली उर्फ सैफिया की आपस में रिश्तेदारी थी। वारदात करने से पहले पांचों लोग एक जगह इकट्ठे हो जाते थे। इसके बाद योजना बनाकर ठिकाने की रेकी करने के बाद वारदात को अंजाम देते थे। शहर के मोहल्ला सिंजई में रहने वाले सर्राफा व्यापारी विकास वर्मा ने सेहरामऊ दक्षिणी क्षेत्र में अपनी दुकान खोल रखी थी। लूटपाट करने के बाद गैंग के सदस्य विकास को जेवर बेचते थे। कुछ दिन डेरे में रुकने बाद फिर गैंग के सदस्य सक्रिय हो जाते थे।
घुमंतू परिवार के हैं गिरोह के सदस्य
पुलिस रिकार्ड में पठान गैंग के सदस्यों का कोई स्थाई पता नहीं है। गिरोह के सदस्य बांग्लादेश के रहने वाले हैं, इस बारे में भी पुलिस के पास कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है। बकौल पुलिस, यह लोग घुमंतू हैं। कहीं स्थाई ठिकाना बना कर नहीं रहते हैं। एक स्थान पर साल-दो साल रुकते हैं। इस बीच बड़ी वारदातों को अंजाम देते हैं और फिर नए ठिकाने की तलाश में आगे बढ़ जाते हैं।