शहर के रंगमहला स्थित एक कारोबारी के घर में नकली मोबिल ऑयल बनाने का कारखाना पकड़ा गया है। यह धंधा यहां आठ साल से चल रहा था। शनिवार को पुलिस के छापे में सेठ मनोज अग्रवाल की कोठी के आंगन और कमरों में नकली मोबिल बनाने का सामान और 1250 लीटर तैयार नकली मोबिल मिला। पुलिस का छापा पड़ते ही मनोज अग्रवाल मौके से भाग निकला। देर शाम तक चली तलाशी और पड़ताल के बाद फरार मनोज अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया, उसकी तलाश में दबिश देेने को टीमें रवाना कर दी गई हैं।
यह नकली मोबिल ऑयल मिट्टी के तेल में ग्रीस, सर्फ और कुछ केमिकल मिलाकर तैयार किया जा रहा था। रिहायशी कोठी में नकली मोबिल बनाने की फैक्ट्री चलने की सूचना पर शनिवार दोपहर बाद क्राइम ब्रांच, स्वैट और चौक कोतवाली पुलिस ने दबिश दी तो इलाके में हड़कंप मच गया। कोठी में मनोज अग्रवाल के साथ उनके भाई मुकेश और राकेश अग्रवाल के परिवार रहते हैं। कोठी में पुलिस के घुसते ही मनोज चुपचाप फरार हो गया। दो घंटे से ज्यादा चले तलाशी अभियान के दौरान घोड़ा ब्रांड वाले रैपर और केन के अलावा बाजार में बिकने वाले कई ब्रांडेड कंपनियों के सैकड़ों रैपर, मोबिल ऑयल भरने को रखे गए छोटे-बड़े सैकड़ों केन भी बरामद हुए। पुलिस को जानकारी मिली है कि 200 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दुकानदारों के यहां यह नकली मोबिल ऑयल खपाया जा रहा था।
मोबिल ऑयल खरीदने और बेचने के कारोबार का लाइसेंस कोठी में तलाशी के दौरान मिला है। माना जा रहा है कि इसी लाइसेंस की आड़ में नकली मोबिल का धंधा चल रहा था। एसपी बबलू कुमार ने बताया कि प्रारंभिक पड़ताल में पता चला है कि नकली मोबिल ऑयल के अलावा मनोज अग्रवाल कुछ अन्य नकली सामग्री बनाकर बाजार में खपाता है। इस बारे में भी पता लगाया जा रहा है, लेकिन उससे पहले ज्यादा जोर मनोज की गिरफ्तारी पर है। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।