वर्ष 2010 में तिलहर के मोहल्ला हिंदू पट्टी में दहेज की मांग पूरी न होने पर एक विवाहिता की जलाकर हत्या कर देने के मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल पांडेय ने शुक्रवार को सुनवाई पूरी करते हुए मृतका के पति और देवर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन पर चालीस-चालीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अर्थदंड की देय धनराशि में से तीन चौथाई राशि वादी राजबहादुर को क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मुरादाबाद के मोहल्ला गोविंदनगर निवासी राजबहादुर ने चार अगस्त, 2010 को तिलहर थाने में अपनी बेटी काजल सक्सेना को दहेज की मांग पूरी न होने पर जलाकर मार डालने की रिपोर्ट काजल के पति मुकेश सक्सेना, देवर राकेश कुमार उर्फ कल्लू के खिलाफ लिखाई थी। राजबहादुर ने बताया कि उन्होंने बेटी काजल की शादी 15 नवंबर, 2008 को तिलहर के मोहल्ला हिंदू पट्टी निवासी मुकेश सक्सेना के साथ की थी। शादी में उसने हैसियत के अनुसार दान दहेज दिया था लेकिन सुराल वाले उससे संतुष्ट नहीं थे और उसकी पुत्री को छोड़ने की धमकी दे रहे थे। चार अगस्त, 2010 को कल्लू ने सूचना दी कि काजल आग लगाकर मर गई। वह मौके पर पहुंचे तो पुत्री की लाश मिली। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना के उपरांत मामला न्यायालय भेज दिया। अपर सत्र न्यायाधीश ने सभी साक्ष्यों का परीक्षण, गवाहाें के बयान और सरकारी वकील सुनील सिंह के तर्काें को सुनने के बाद आरोपी मुकेश सक्सेना, राकेश कुमार उर्फ कल्लू को दोषी पाते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।