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मोना के प्यार में घर भी छोड़ चुका था शिशुपाल

Sun, 04 Jan 2015 12:05 AM IST
शाहजहांपुर
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मोना के प्यार में शिशुपाल ने अपने घर भी जाना छोड़ दिया था। वह परिवार के लोगों से लगाव नहीं रखता था। शिशुपाल के पिता मुन्ना लाल उसकी दूसरी शादी कराना चाहते थे, लेकिन शिशुपाल इसके लिए तैयार नहीं था। हालांकि शिशुपाल ने अपने परिवार वालों के सामने कभी मोना का जिक्र भी नहीं किया था।
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पोस्टमार्टम हाउस पर शिशुपाल के पिता मुन्नालाल ने बताया कि वह पिछले आठ महीनों में एक-दो बार ही गांव आया था। घटना से तीन दिन पहले शिशुपाल गांव गया था। एक घंटा रुकने के बाद ही वह गांव से चल दिया था। पिता ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन शिशुपाल नहीं माना था।

दूसरी जगह शादी से कर दिया था इनकार
पिता मुन्नालाल ने बताया कि पहली पत्नी से अलगाव होने के बाद परिवार के लोग शिशुपाल की दूसरी शादी कराना चाहते थे। आठ दिन पहले शिशुपाल परिवार के लोगों के साथ मोहम्मदी में लड़की देखने गया था, लेकिन शिशुपाल ने लड़की सही न होने का बहाना बनाकर शादी से इनकार कर दिया था।
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मोना के घरवालों ने भी कुछ नहीं बताया
मुन्ना लाल का कहना है कि अगर मोना के परिवार वालों ने बताया होता कि वह उनकी बेटी से शादी करना चाहता है तो शायद वह शिशुपाल को समझाकर रोकने का प्रयास करते। हो सकता है कि परिवार वालों के समझाने पर शिशुपाल मान भी जाता और ऐसी घटना नहीं होती। बरेली में सीओ चतुर्थ कार्यालय में तैनात शिशुपाल के चाचा कांस्टेबिल भूधर ने कहा कि अगर इस बात का पता चल जाता तो वह शिशुपाल का तबादला बरेली में करा लेते।

घंटों मोबाइल पर बात होती थी मोना से
शिशुपाल और मोना के मोबाइल में मिली कॉल डिटेल से पता लगा है कि मोना और उसके बीच घंटों बातें हुआ करती थीं। शिशुपाल के मोबाइल से ज्यादातर कॉल मोना के मोबाइल पर हुईं थीं।

डायरी में लिखी हर लाइन में मोना का जिक्र्र
शिशुपाल के कमरे से बरामद हुई उसकी डायरी में लिखी हर लाइन में मोना का जिक्र था। डायरी में लिखी बातों से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि शिशुपाल, मोना के प्यार में बिल्कुल पागल हो गया था। उसे मोना के अलावा दुनिया में किसी से कोई मतलब नहीं था। उसने जो सुसाइड नोट लिखा, वह भी किसी डायरी का ही पन्ना था। हालांकि अब बरामद डायरी वह नहीं है। सुसाइड नोट की भाषा से साफ लगता है कि शिशुपाल ने मोना को मारने के बाद ही यह लिखा था। यह भी हो सकता है कि मारने के बाद उसे आत्मग्लानि हुई और उसने खुद की भी जीवनलीला खत्म कर दी।

समझदार बेटी कैसे फंस गई चक्कर में
मोना के पिता ने बताया कि उनकी बेटी बहुत समझदार थी। वह चौकीदारी करके परिवार का गुजारा करता है। मोना ने परिवार के खर्चें में हाथ बंटाने के लिए वह गुदड़ी बाजार में एक दुकान में नौकरी करने लगी थी। पता नहीं कैसे मोना शिशुपाल के चक्कर में फंस गई।
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