24 साल बाद फैसला, सुनवाई के दौरान चार आरोपियों की हो चुकी है मौत
1992 में निगोही में डाला था डाका, फायरिंग की थी
घिरने पर डकैतों ने कर दी थी एक ग्रामीण की हत्या
जिले के निगोही थाना क्षेत्र के गांव सफौरा में 24 साल पहले डकैती और उस दौरान एक ग्रामीण की हत्या के मामले में सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम फराह मतलूब ने आरोपियों में से जीवित बचे छह को दोषी पाते हुए उम्रकैद की ससजा सुनाई है। आरोपियों में पुवायां के गांव बुझिया निवासी फूलचंद उर्फ फुलवा, निगोही के गांव मधवामई का गोधन, बहादुरपुर का रामविलास, सिंधौली थाना क्षेत्र के गांव दौलतपुर का साधु सिंह, पीलीभीत के बिलसंडा थाने के गांव मीरपुर नुकिया का भवानी तेली और गांव नगरिया टिलगिरी का बाबू भुर्जी शामिल है। न्यायाधीश ने सभी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी डाला है। जुर्माने की रकम में से 60 हजार रुपये डकैतों की गोली से मारे गए ग्रामीण दुर्जन उर्फ साधु के वारिस को देने का आदेश दिया है।
डकैती की यह घटना 24 सितंबर, 1992 की रात एक बजे हुई। निगोही के गांव सफौरा में महेश पाल, उसका चचेरा भाई जगपाल और चाचा गेंदन लाल अपने-अपने घरों में सो रहे थे। रात एक बजे 10 डकैतों के गिरोह ने बंदूकों के साथ इनके घरों पर धावा बोल दिया। डकैतों ने परिवार के लोगों की बंदूकों की बटों से पिटाई की और ताबड़तोड़ हवाई फायरिंग करते हुए जेवर, नगदी लूट ली। महेश ने भागने की कोशिश की तो डकैतों ने उन्हें गोली मार दी। इससे वह घायल हो गए। गांव के दुर्जन उर्फ साधू, बाबू राम, नन्हे, वर्मा सिंह, बेचे लाल आदि हाथों में लाठी और टार्च लेकर मौके पहुंचे और ललकारते हुए डकैतों को घेरने का प्रयास किया। खुद को घिरा देख डकैतों ने सीधी फायरिंग शुरू कर दी। इसमें दुर्जन उर्फ साधू की गोली लगने से मौत हो गई।
गांव वालों को साथ लेकर सुबह महेश निगोही थाने पहुंचे और आईपीसी की धारा 396 और 412 में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने एक-एक कर पुलिस ने सभी आरोपी डकैतों को धर दबोचा और उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे की सुनवाई की अवधि में आरोपी निगोही के गांव सतवां खुर्द निवासी वेदराम उर्फ वेदा, मधवामई के नत्थू जाटव, हरसेली के हीरालाल जाटव और बहादुरपुर के श्रीपाल जाटव की मौत हो गई। सरकारी वकील मनफूल सिंह वर्मा ने कुल 10 गवाह पेश किए। गवाहों के बयान और पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।