सदर बाजार थाने के खिरनीबाग स्थित बसंत क्लीनिक वाले मकान में मंगलवार को दिनदहाड़े घुसकर शिक्षिका रोली गुप्ता को जान से मारने की कोशिश, मारपीट और लूट की कोशिश वाली घटना में पुलिस को अहम जानकारी हाथ लगी। लुटेरों के लिए क्लीनिक के कंपाउंडर अरविंद पाल उर्फ राजू ने मुखबिरी की थी। मौके पर ही पकड़े गए लुटेरे विवेक मौर्या (निवासी मोहल्ला तिलहरजई) से की पूछताछ में यह भेद खुला। रोजा थाना क्षेत्र के बल्लिया निवासी राजू को रात में ही दबिश देकर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बुधवार तीसरे पहर कोर्ट में पेश किया गया, यहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। विवेक ने पुलिस को बताया कि उसके साथ इस घटना में पुवायां निवासी सचिन और उस्मान बाग चौकी के पास फ्रिज रिपेयरिंग की दुकान चलाने वाला पक्का तालाब निवासी आफताब शामिल थे। योजना करीब 27 दिनों पहले से आफताब के दुकान पर बननी शुरू हुई और अरविंद ने मुखबिरी की। उसने मंगलवार को क्लीनिक बंद रहने और मकान में सिर्फ महिलाओं के होने की जानकारी दी थी। उसी ने बताया था कि ऐसी हालत में घर में धावा बोलने पर अच्छा माल हाथ लगेगा। बीती देर रात दबिश देकर पुलिस ने जब राजू को दबोचा तो उसने अपराध कबूल कर लिया।
मामले का अनावरण करने वाली पुलिस टीम मेें सदर बाजार थाने के प्रभारी निरीक्षक गजेंद्र सिंह, एसएसआई प्रवेश सिंह, एसआई आसिफ अली, कांस्टेबल सचिन कुमार, अजय मलिक और मनीष कुमार शामिल थे। मीडिया को सीओ सिटी अवनीश्वर चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि राजू के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी भी लगाई गई है जबकि रोली गुप्ता की तहरीर के आधार पर लुटेरों के खिलाफ लूट और जानलेवा हमले में एफआईआर दर्ज है। फरार दोनों लुटेरों की तलाश में टीमें रवाना की गई हैं।
शातिर है विवेक, सात मुकदमे पहले से
शाहजहांपुर। भीड़ द्वारा दबोचे विवेक मौर्या का बड़ा आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ शाहजहांपुर और हरदोई जिले के विभिन्न थानों में सात मुकदमे धारा 392, 411, 356, 506 और 307 के अलावा 8/21 एनडीपीएस एक्ट में दर्ज हैं। शाहजहांपुर में सदर बाजार और तिलहर में जबकि हरदोई में पाली, शाहाबाद और पिहानी थाने में यह केस दर्ज हैं।
यह था घटनाक्रम
बसंत क्लीनिक वाले मकान के मालिक डॉ. विजय गुप्ता अपनी बीमार पत्नी कांति गुप्ता को उपचार के लिए मंगलवार सुबह चिकित्सक बेटे डॉ. हितेश गुप्ता के साथ बरेली गए हुए थे। तभी सुबह करीब नौ बजे कोरियर वाला बनकर तीनों लुटेरे पहुंचे थे और उन्हें दोनों डॉक्टरों के घर पर न होने का हवाला देते हुए लौटा दिया गया। फिर दिन में 11 बजे तीनों कोरियर वाला पैकेट लेकर पहुंचे और घर पर मौजूद डॉ. हितेश की पत्नी अनुजा गुप्ता और शिक्षिका बहन रोली गुप्ता से मिन्नतें की कि कोई दूसरी आईडी देकर कोरियर वाली डिलीवरी ले लें अन्यथा इनकी नई नौकरी चली जाएगी। अपनी आईडी लेकर रोली गुप्ता दरवाजे पर पहुंचीं तो लुटरों ने दरवाजा खुलने के दौरान ही उन्हें जोर का धक्का दिया और रोली के गले को मफलर से कसने की कोशिश की। शिक्षिका के चिल्लाने और लगातार लुटेरों के हमले के बीच भी मुचैटा लेते रहने के दौरान आसपास से लोग मौके पर लपके। लुटेरे भीड़ जुटती देख तमंचा लहराते हुए भागने लगे लेकिन भीड़ ने उनमें विवेक को धर दबोचा और पुलिस को सौंप दिया।