शाहजहांपुर। देश की सीमाओं पर दुश्मनों से लोहा लेने वाले पूर्व सैनिकों को रिटायरमेंट के बाद सरकारी सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार से जूझना पड़ रहा है। पुलवामा में सीआरपीएफ की टुकड़ी पर आतंकी हमले मेें 44 जवानों की शहादत से आक्रोशित पूर्व सैनिकों का कहना है कि सीमा पर तमाम बंदिशों के बीच दुश्मनों से मोर्चा लेना पड़ता है और इस कारण सेना और अर्ध सैनिक बलों पर आए दिन हमले होते हैं और जवानों का मनोबल गिरता है। रही बची कसर सेना से रिटायर होने के बाद पूरी हो जाती है। घरेलू मोर्चे की समस्याओं से निपटने के लिए उन्हें भ्रष्ट सरकारी तंत्र से जूझना पड़ता है। पूर्व सैनिकों के अनुसार जवानों की शहादत को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके आश्रितों को देश के अंदर सरकारी तंत्र से भी सम्मान मिले।
लाइसेंस रिन्यूवल और राशन दुकान आवंटन में दिक्कतें
जिले में 2443 भूतपूर्व सैनिक और 786 दिवंगत सैनिकों की विधवाओं के परिवार निवास कर रहे हैं। यही नहीं, द्वितीय विश्व युद्ध में जिले से अपना योगदान देने वाले मीरानपुर कटरा के मोहल्ला आतिशबाजान निवासी वाहिद अली और इसी विश्व युद्ध में शामिल हुए अन्य सैनिकों की 27 विधवाएं भी अभी जीवित हैं। उन्हें और उनके आश्रितों को पेंशन के अतिरिक्त राज्यऔर केंद्र सरकार की अन्य कई योजनाओं से संतृप्त किया गया है, लेकिन लाभार्थी सैन्य परिवारों की संख्या नगण्य है। उदाहरणार्थ, सैन्य परिवारों के 45 बच्चों को छात्रवृत्ति मिल रही है और दस दिवंगत सैनिकों की बेटियों को 30-30 हजार रुपये शादी अनुदान दिया गया है। पूर्व सैनिकों को आजीविका के लिए राशन कोटा की 38 दुकानें भी आवंटित की गई हैं, लेकिन उन्हें शस्त्र लाइसेंसों के नवीनीकरण, राशन की दुकानों का आवंटन, जमीनों से अवैध कब्जे हटवाने आदि मामूली कामों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
पूर्व सैनिकों को अनुमन्य सुविधाओं से सरकारी विभाग बेखबर
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी पद पर कार्यरत रहने के दौरान सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन प्रमोद कुमार गुप्ता भूतपूर्व सैनिकों को घरेलू मोर्चे की समस्याओं को लेकर जूझते हुए काफी नजदीक से देख चुके हैं। उनका कहना है कि यह दुर्भाग्य की बात है कि केंद्र और राज्य सरकारें पूर्व सैनिकों के लिए जो सुविधाएं अनुमन्य करती हैं, उनकी जानकारी सरकारी विभागों को नहीं होती। क्योंकि वहां तक संबंधित शासनादेश नहीं पहुंचते। उदाहरणार्थ, पूर्व सैनिकों को शस्त्र लाइसेंस की रिन्यूवल फीस माफ है। इसके बावजूद पूर्व सैनिकों से एनओसी लेने, एफडी कराने या फिर राइफल क्लब की रसीद कटाने को बाध्य किया जाता है। इसी तरह युद्ध में शहीद सैनिकों की विधवाओं से हाउस टैक्स माफ है, लेकिन उन पर गृह कर की देनदारी निकाल दी जाती है। उन्होंने कहा कि किसी भी दफ्तर में जाने पर पूर्व सैनिकों को बोझ समझ लिया जाता है। जबकि पूर्व सैनिकों को देखने का नजरिया कहीं बड़ा होना चाहिए।
भूतपूर्व सैनिकों की समस्या कोई भी हो, उसके समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। जिला सैनिक कल्याण कार्यालय से संबंधित विभागों को उनके प्रकरण इसी अपेक्षा के साथ भेजे जाते हैं कि उनका निस्तारण सर्वोच्च प्राथमिकता देकर किया जाए।
लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) देव गिरि, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी