एसआईटी ने संयुक्त तौर पर दोनों एफआईआर पर जांच की। नौ अक्तूबर 2020 को छात्रा ने अपने साथ दुष्कर्म होने की बात से इन्कार कर दिया। उसने लोगों के बहकावे और दबाव में आकर चिन्मयानंद पर आरोप लगाने की बात स्वीकारी थी। इसके बाद अदालत ने चिन्मयानंद को बरी कर दिया था।
सीआरपीसी की धारा 344 यह है
बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव अनित त्रिवेदी ने बताया कि मिथ्या साक्ष्य देने पर सीआरपीसी की धारा 344 के तहत अदालत वादी पक्ष के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इसमें 500 रुपये तक जुर्माना और अधिकतम तीन महीने तक की सजा का प्रावधान है।