शाहजहांपुर। जिला ग्रीन जोन में आने पर लॉकडाउन में ढील क्या दी गई लोग बेकाबू हो गए। बाजार तो भीड़ से बेजार हैं ही, सरकारी दफ्तरों तक का बुरा हाल है। यहां उमड़ने वाली भीड़ न तो सामाजिक दूरी की चिंता है न ही कोरोना संक्रमण फैलने के खतरे का खौफ। प्रशासन और पुलिस भी सामाजिक दूरी का पालन कराने के लिए गंभीर नजर नहीं आ रहा। मंगलवार को कचहरी मार्ग पर जजी और कलक्ट्रेट गेट पर लोगों की भीड़ देख उन्हें तितर-बितर करने के लिए एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी को खुद मोर्चा संभालना पड़ा।
22 मार्च को जनता कर्फ्यू का नजारा देख लगा कि लोग वाकई कोरोना को लेकर गंभीर हैं। बाद में लॉकडाउन हुआ तो कई इलाकों में लोग बेपरवाह नजर आने लगे। सब्जी मड़ियों और थोक बाजारों में जमकर सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ाई जाती रही। हालांकि कुछ जगह पुलिस ने सख्ती दिखाई तो भीड़ कम हुई, लेकिन पुलिस के हटते ही हालात फिर पहले जैसे ही हो गए। लॉकडाउन का तीसरा दौर शुरू हुआ तो जिला ग्रीन जोन में आने पर दुकानें खोलने की राहत मिली तो बेवजह लोगों का टहलना भी शुरू हो गया।
मंगलवार को महानगर में विभिन्न स्थानों पर लोग सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ाते देखे गए। कलक्ट्रेट में ई-पास के लिए साक्ष्यों की मूल प्रतियां सत्यापित कराने के लिए लोगों में होड़ लगी नजर आई क्योंकि एक ही पटल पर तमाम लोग झुंड बनाए खड़े थे। दवा खरीदने की जल्दबाजी में लोग मेडिकल स्टोर पर बनाए गए गोले नजरंदाज कर रहे थे, जबकि दवा की दुकानें सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक खुल रही हैं। जलालनगर में खिलौना शॉप, बहादुरगंज में गल्ला मंडी और किताबों की दुकानें भीड़ से घिरी रहीं। सड़कों पर ई-रिक्शा उतरे तो बहादुरगंज मेें उनकी वजह से जाम लग गया।
बैंकों में भीड़ रोकने में काम आई मोबाइल वैन
बैंकों में नकदी निकासी के लिए उमड़ रही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्र में सक्रिय मोबाइल कैश वैन का महानगर मेें सहारा लेना पड़ा। बता दें कि बीते दिन तिलहर क्षेत्र के विधायक रोशन लाल वर्मा ने इस बारे में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र सिंह तंवर को अवगत कराते हुए ऐसी व्यवस्था कराने को कहा कि मामूली रकम पाने के लिए गरीब तबके लोगों को बैंकों के बाहर अनावश्यक कतारें नहीं लगानी पड़ें। सीडीओ तंवर ने बताया कि एसबीआई और बॉब की चारों कैश वैन से सीमित रकम का भुगतान कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले मेें 216 डाकिया गांव-गांव घूमकर मिनी एटीएम मशीन से ग्रामीण खातेदारों के आधार और आईएफएससी कोड सत्यापित कर अभी तक पांच करोड़ रुपये के भुगतान कर चुके हैं।