स्वामी शुकदेवानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया। समापन पर कथा व्यास स्वामी श्रवणानंद महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग पर चर्चा कर श्रोताओं को धन्य किया।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान के विवाहों पर जो लेशमात्र भी आक्षेप करते हैं, उन्हें पता ही नहीं भगवान ने यहां बहुत बड़ी क्रांति की। सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सुदामा भगवान के अनन्य भक्त थे। सुदामा ने भगवान से कभी कुछ नहीं मांगा, फिर भी भगवान ने उन्हें ऐश्वर्य प्रदान किया। उन्होंने कहा कि भागवत धर्म इतना सरल मार्ग है, इसमें चाहे व्यक्ति आंख बंद करके चले या दौड़े, कोई गिरने का खतरा नहीं है। जो भी काया, मन और वाणी से कर्म करते हैं, उसे भगवान को समर्पित करते चलें तो वह धर्ममय हो जाता है।
महाभागवत ज्ञान यज्ञ के समापन पर स्वामी विवेकानंद महाराज, राजेश्वरानंद महाराज एवं स्वामी सर्वेश्वरानंद महाराज का उद्बोधन और आशीर्वाद श्रोताओं को प्राप्त हुआ। महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद महाराज ने ज्ञान, भक्ति, वैराग्य व दर्शन का उपदेश देते हुए स्वामी चिन्मयानंद के दीर्घायु की कामना की। इस अवसर पर अन्य साधु-संतों ने भी स्वामी चिन्मयानंद को आशीर्वाद दिया। समापन पर कथा व्यास ने मुख्य यजमान रजनीश गुप्ता समेत महाविद्यालय के स्टाफ एवं अति गणमान्यों को रुद्राक्ष की माला भेंट की।
इससे पूर्व गायत्री महायज्ञ के मुख्य यजमान डॉ. केके शुक्ला ने पूजन एवं यज्ञ किया। यज्ञ में पूर्ण आहूति स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती ने दी। इस मौके पर डॉ. रवि मोहन, डॉ. सत्यप्रकाश मिश्र, रामचंद्र सिंघल, कैलाश नारायण अग्रवाल, आचार्य पद्मनाभ, प्राचार्य डॉ. अवनीश मिश्र, श्रीप्रकाश डबराल, चंद्रभान त्रिपाठी, डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. प्रभात शुक्ल, डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री, जगतबंधु रघुवंशी आदि मौजूद रहे। समापन पर भंडारा भी हुआ।