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सुभाषनगर की सड़कों पर बाढ़, नाव में बैठकर आ-जा रहे लोग

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शाहजहांपुर के जलालाबाद क्षेत्र में कोला मार्ग पर रह रहे बाढ़ पीड़ित परिवार में चारपाई की आड़ करक? - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। गंगा-रामगंगा, गर्रा और खन्नौत आदि नदियों का जलस्तर सोमवार को कुछ कम हुआ, लेकिन बाढ़ में कोई कमी नहीं आई। इससे बाढ़ग्रस्त इलाकों में संकट बरकरार है। उफनाई गर्रा नदी का पानी भरने से शहर के सुभाषनगर मोहल्ले काफी इलाका जलमग्न है। बाढ़ से घिरे घरों में रहने वाले लोग नाव में बैठकर आ जा रहे हैं। उधर, गंगा-रामगंगा की बाढ़ से मिर्जापुर, परौर, जैतीपुर और अल्हागंज क्षेत्र के तमाम गांव बाढ़ से घिरे हैं। मिर्जापुर के कसारी गांव में रहने वाले परिवार सड़क किनारे तंबू लगाकर रह रहे हैं।
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उधर, डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने सोमवार को जलालाबाद व कलान तहसील के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित परिवारों को सड़क पर रुकने के बजाय स्कूल, पंचायत भवन आदि सुरक्षित स्थानों पर रहने को कहा।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार बांधों-बैराजों से सोमवार को पानी की निकासी कुछ कम हुई है। नरौरा बैराज से पानी का बहाव 2.04 लाख क्यूसेक से घटकर 96305 क्यूसेक रह गया है। इससे कलान के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर तीन सेमी कम होकर 143.47 मीटर हो गया है। अन्य बैराजों से पानी की निकासी कम होने से बरेली के चौबारी घाट से लेकर कलान तहसील के मिर्जापुर और परौर तक रामगंगा 25 सेमी घटकर 161.10 मीटर पर बह रही है। इसी तरह ड्यूनी डाम से दो दिन पहले की तुलना में पानी की निकासी करीब 30 हजार क्यूसेक घटकर 4723 क्यूसेक रह जाने से गर्रा नदी दस सेमी कम हुई। हालांकि खन्नौत का बहाव सोमवार को तीसरे दिन भी 145.30 मीटर पर स्थिर रहा। मगर दो दिन पहले बैराजों से अधिक मात्रा में निकला पानी यहां पहुंचने से नदियों में उफान बरकरार है।
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शहरी क्षेत्र में गर्रा और खन्नौत नदियों के तटीय इलाकों में रहने वालों को बाढ़ के कोप से अभी राहत नहीं मिल सकी है। शहबाजनगर और किला की पुरानी रेलवे लाइन के पश्चिम दिशा में अधिकांश खेतों में पांच से छह फुट पानी भरा है, जिससे फसलें डूबी हुई हैं। यहां बरुआ नाला के रास्ते गर्रा की बाढ़ नदी का पानी शहर के सुभाषनगर इलाके में भरा है। सुभाषनगर के कई रास्तों पर तीन से चार फुट पानी भरा है, जिससे सैकड़ों मकानों के इर्द-गिर्द पानी बह रहा है। इससे रविवार शाम कई मरीजों को नाव से बाहर निकाला गया।
सुभाषनगर निवासी मुकेश चंद्रा के अनुसार उन्होंने अपने मोहल्ले में बाढ़ का ऐसा प्रकोप पहले कभी नहीं देखा। गर्रा की बाढ़ का यह नजारा सुभाषनगर से ककरा कलां और जियाखेल तक बना हुआ है। उधर, शहर के पूर्वी छोर पर बहने वाली खन्नौत नदी की बाढ़ से लोधीपुर, बहादुरपुरा, बंका घाट, बिसरात, हनुमत धाम, दलेलगंज, सरायकाइयां आदि क्षेत्रों के तटीय इलाके डूबे हैं। मोहल्ला मगही टोला में नगर निगम के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का परिसर भी खन्नौत की चपेट में आकर जलमग्न हो गया है।
दर्जनों गांव जलमग्न, सड़कों पर रातें गुजार रहे लोग
शाहजहांपुर। रामगंगा के उफनाने से जलालाबाद क्षेत्र में आई बाढ़ से हालात बदतर हो गए हैं। दर्जनों गांव जलमग्न हैं। सैकड़ों परिवार सड़क पर रातें गुजार रहे हैं। बाढ़ में फंसे होने से बच्चों, बुजुर्गों के अलावा बीमारों का बुरा हाल है। खेत जलमग्न होने से फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं।
पिछले कई दिनों से कलान, परौर तथा मिर्जापुर के इलाके में लगातार बढ़ रहे पानी ने रविवार रात से जलालाबाद क्षेत्र में भी दस्तक दे दी। कोलाघाट पुल के किनारे कसारी खुर्द व कसारी बुजुर्ग समेत एलमनगर कटरिया, अल्हादादपुर, बिहारी, रैपुरा, बीघापुर, रौली बौरी, धींयरपुरा, नूरपुर करही आदि गांव पूरी तरह जलमग्न हो जाने से सैकड़ों परिवारों ने कोला रोड पर शरण ले रखी है। यह परिवार पन्नी तानकर या तांगा, डनलप के चारों ओर धोती लपेटकर रह रहे हैं।
सात दशक में कभी नहीं देखे ऐसे हालात
बरसात के मौसम में बाढ़ की विभीषका से जलालाबाद क्षेत्र के लोगों ने कई बार तबाही होती देखी है, लेकिन अक्तूबर माह में बाढ़ के ऐसे हालात क्षेत्र के बुजुर्गों ने भी इससे पहले कभी नहीं देखे। कसारी गांव के 65 वर्षीय पूर्व प्रधान सोनपाल के अनुसार उन्होंने जीवन के इतने साल कटरी इलाके की नदियों किनारे ही बिताए, परंतु बेमौसम ऐसे बारिश और बाढ़ नहीं देखी। उन्होंने बताया कि गांव के लोग खाने से लेकर पीने के साफ पानी तक को परेशान हैं। पन्नी, तिरपाल आदि की व्यवस्था न हो पाने से चारपाई पर छाता लगाकर बैठीं गांव रैपुरा निवासी 75 वर्षीय रेशमा भी कहती है कि इस मौसम में ऐसी तबाही कभी नही देखी। बताया कि उनका परिवार तीन दिन से सड़क पर खुले आसमान के नीचे पड़ा है और रात में ठंड के चलते नींद भी नहीं आती।
बड़े वाहनों के लिए फिर बंद हुआ कोला रोड
कोलाघाट पुल की मरम्मत के चलते करीब दस दिन से ज्यादा बंद रहा कोला रोड तीन दिन पहले ही आवागमन के लिए शुरू हुआ था।अचानक आई बाढ़ से कोला रोड कई जगहों पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त होगया है। साथ ही इलाके के विभिन्न गांवों के बाढ़ प्रभावित लोगों ने सड़क पर ही रहने के ठिकाने बना रखे हैं। इसे देखते हुए प्रशासन ने कोला रोड से भारी वाहनों का आवागमन बन्द कर दिया है।
जरीनपुर में बैरीकेडिंग कर बंद किया जलालाबाद रोड
शाहजहांपुर। मिर्जापुर क्षेत्र में रामगंगा की प्रलयंकारी बाढ़ से बदायूं-जलालाबाद-शाहजहांपुर हाईवे पर कोलाघाट पुल की एप्रोच रोड कई जगह धंस गई है। इससे भारी वाहनों को खतरा देखते हुए जरीनपुर के पास जलालाबाद मार्ग पर बैरीकेडिंग भारी वाहनों आवागमन रोक दिया गया है। अब कोलाघाट पुल से सिर्फ दुपहिया और हल्के वाहनों को ही निकाला जा रहा है। मिर्जापुर में मुरादाबाद-फर्रुखाबाद स्टेट हाईवे पर भी पानी आ जाने से भारी वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया है। संवाद
अल्हागंज क्षेत्र के गांवों से ग्रामीणों का पलायन
अल्हागंज। रामगंगा में बाढ़ से क्षेत्र के गांव चंपतपुर, रघुनाथपुर, मऊ शाहजहांपुर, मऊ रसूलपुर, नौसारा, बिचपुरिया, कनारी, भरथौली, गोरा, दहेना, मनिहार, अशरफपुर, मिघौल, रत्नापुर, वजीरपुर आदि एक दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। इन सभी गांवों के संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं। चंपतपुर का संपर्क मार्ग कट जाने से ग्रामीण कमर तक पानी में घुसकर अपना घरेलू सामान लेने मुख्य मार्ग पर पहुंच रहे हैं। कई गांवों के ग्रामीणों ने अपने घरों से पलायन कर दिया है। वह अपना आवश्यक सामान और पशुओं को लेकर रामगंगा नदी पुल के आसपास अपना आशियाना बना रहे हैं। अब बाढ़ का पानी अल्हागंज-बिलग्राम मार्ग से टकरा रहा है। संवाद
मछली पकड़ने गया युवक पानी में डूबा
सोमवार दोपहर गांव रौली बौरी निवासी 35 वर्षीय कालीचरण गांव के सामने फर्रुखाबाद हाईवे के किनारे बाढ़ के पानी में मछली का शिकार कर रहे थे। जाल निकालने के दौरान गहरे पानी की तरफ बढ़ जाने से उनका पैर फिसल गया और वह डूब गए। गनीमतरही कि कुछ दूर मौजूद उनके चचेरे भाई लाला ने उन्हें डूबता देख पानी में छलांग लगा दी और किसी तरह उन्हें बाहर निकाल लिया। घरवालों की मदद से बेहोशी की हालत में उन्हें सीएचसी ले जाया गया, लेकिन हालत नाजुक होने के कारण डाक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
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