शाहजहांपुर। सड़क दुर्घटना को रोकने के लिए लोगों को जागरूक किए जाने को 5 से 11 अक्टूबर तक दूसरा सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाएगा। कोरोना के चलते इस बार कार्यशाला, रैली व नुक्कड़ नाटकों का आयोजन नहीं किया जाएगा। सामाजिक दूरी का पालन करते हुए भीड़भाड भीड़भाड़ एकत्रित किए बिना ही वाहन चालकों को जागरूक किया जाएगा। इसके लिए तैयारियां कर ली गई हैं। वहीं अब देखने वाली बात यह होगी कि हर बार की तरह सड़क सुरक्षा सप्ताह सिर्फ औपचारिकता बनकर न रह जाए।
साल में चार सड़क सप्ताह सुरक्षा सप्ताह मनाए जाने के निर्देश हैं। पांच अक्तूबर से द्वितीय सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाएगा। इसके लिए प्रमख सचिव की ओर से पत्र जारी कर प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। इसके तहत कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए सामाजिक दूरी बनाए रखने के उद्देश्य से सड़क सुरक्षा से संबधित वृहद कार्यशाला, रैली, नुक्कड़ नाटक आदि नहीं होंगे। भीड़ को एकत्रित किए बिना ही लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके लिए कार्यक्रम तय कर दिए गए हैं। पहले दिन पांच अक्तूबर को सड़क सुरक्षा संदेश संचार तथा सभी स्टेक होल्डर्स के सहयोग से प्रचार-प्रसार व प्रदूषण चेकिंग होगी। इसके साथ ही सेव लाइफ फाउंडेशन के सहयोग से फर्स्ट रेस्पांडर की ट्रेनिंग दी जाएगी। दूसरे दिन छह अक्तूबर को प्रवर्तन दलों द्वारा विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में हेलमेट/सीट बेल्ट का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक किया जाएगा। तीसरे दिन स्कूली छात्रों को सड़क सुरक्षा के बारे में ऑनलाइन प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। चौधे दिन प्रदूषण संबंधी जांच की जाएगी। इसके बाद पांचवे दिन ऑनलाइन ड्राइविंग ट्रेनिंग दिए जाने को लेकर एआरटीओ को निर्देशित किया गया है। छठे और सातवें दिन भी कार्यक्रमों का आयोजन होगा।
नहीं लग पाती सड़क दुर्घटनाओं पर रोक
सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाने के बाद भी सड़क हादसों पर रोक नहीं लग पाती। आलम यह है कि सड़कों पर वाहनों की संख्या चार गुना बढ़ गई है और सड़क दुर्घटनाएं में इजाफा हुआ है। इसको ध्यान में रखकर हाईकोर्ट ने यातायात पुलिस को हाईटेक तरीके से यातायात व्यवस्था को संचालित करने को कहा है। लेकिन शहर में न तो यह व्यवस्था हैं और ना ही ऐसे साधन जिससे लोगों को यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराया जा सके। इसकी वजह से लोग भी बेखौफ ट्रैफिक नियमों को तोड़ते नजर आते हैं।
सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी से हो रहे हादसे
दोपहिया वाहन चालकों के लिए शासन ने हेलमेट पहनना अनिवार्य किया है। इसके लिए लोगों को जागरूक किया जाता है, इसके बाद भी सुधार नहीं होने पर चालान करने के निर्देश दिए थे। पिछले महीनों में हजारों लोगों का चालान काटा गया। लाखों रुपये की वसूली हुई। लेकिन कुछ दिनों की सख्ती के बाद फिर लोगों ने हेलमेट पहनना बंद कर दिया है। स्थिति पहले जैसे हो गई है। वहीं तीन सवारियों को बैठना और वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना आम बात हो गई है। लोगों द्वारा सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही है, जिससे आए दिन सड़क पर दुर्घटनाएं हो रही है। वाहनों से गिरकर घायल होने के मामलों पर चाहकर भी रोक नहीं लग पा रहा है। इसलिए यातायात नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
यातायात नियमों का सख्ती से पालन हो इसके लिए प्रयास किए जाते हैं। उप संभागीय परिवहन कार्यालय एवं पुलिस विभाग संयुक्त रूप से यातायात सप्ताह के तहत लोगों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूक करेगा। जिसके लिए कार्यक्रम प्राप्त हो गया है। पांच से 11 अक्टूबर तक सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाएगा। - मनोज कुमार, एआरटीओ प्रशासन