शाहजहांपुर/परौर। अगस्त के अंतिम सप्ताह से लेकर सितंबर के दूसरे सप्ताह तक कलान तहसील क्षेत्र में गंगा, रामगंगा में आई बाढ़ से करीब आधा दर्जन गांवों की सैकड़ों बीघा कृषि भूमि पर खड़ी फसलें पानी में डूबी रहने से बरबाद हो गईं। यही नहीं, मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा के तटवर्ती गांवों में पानी भरने से करीब 250 से अधिक परिवारों को घरों से विस्थापित होकर सुरक्षित स्थानों पर खानाबदोशों की तरह जीवन बिताना पड़ा। इन परिवारों को फसली नुकसान का मुआवजा मिलने की आस थी, लेकिन प्रशासन की फसली सर्वे रिपोर्ट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। राजस्व विभाग ने सिर्फ 12 हेक्टेयर मेें फसलों को 33 फीसदी से कम नुकसान बताकर मुआवजा देने से बचने की राह तलाश ली।
बाढ़ के दौरान कलान तहसील के विकास खंड मिर्जापुर के अंतर्गत इस्लामनगर और पैलानी उत्तरी के ग्रामीण किसान सर्वाधिक प्रभावित हुए थे। बाढ़ में डूबे खेतों में खड़ी गन्ने की फसल सुरक्षित रही, लेकिन तिल, उड़द, बाजरा, शकरकंद आदि फसलों को व्यापक क्षति हुई थी। बाढ़ का पानी उतरने के बाद शुरुआती दस दिन तक खेतों में पानी भरा होने का बहाना कर राजस्व विभाग के अधिकारी फसली नुकसान का सर्वे कार्य टालते रहे। किसानों ने नष्ट हुई फसलों का मुआवजा मांगना शुरू किया तो कलान के एसडीएम रमेश बाबू ने क्षेत्रीय लेखपालों से मिर्जापुर क्षेत्र के इन दोनों गांवों समेत परौर क्षेत्र में नारायणनगर, मोहनपुर, मंझा आदि गांवों मेें डूबी फसलों का सर्वे कराया।
कलान तहसील से जिला मुख्यालय पर भेजी फसली नुकसान की सर्वे रिपोर्ट में बताया गया कि तहसील के तीन-चार गांवों की 12 हेक्टेयर कृषि भूमि पर सिर्फ 33 फीसदी से कम फसलों को नुकसान पहुंचा। बता दें कि दैवी आपदा राहत कोष से बाढ़ से नष्ट फसलों का मुआवजा उसी दशा में देय होता है, जब किसी खेत में एक तिहाई से अधिक फसल नष्ट हुई हो। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन किसानों ने नष्ट हुई फसलों का बीमा कराया है, उन्हें उचित प्रक्रिया अपनाने पर बीमा दावों का भुगतान होगा, बशर्ते बीमा कंपनी के प्रतिनिधि अपनी सर्वे रिपोर्ट में नुकसान को प्रमाणित करें।
प्रभावित किसानों की बात
मेरा रामगंगा की तराई में खेत है। खेत में उर्द और तिल की बुआई कराई थी। बाढ़ आने से सब कुछ चला गया। सरकार से मदद नहीं मिली तो अगली फसल के लिए लागत जुटानी कठिन हो जाएगी।
- धनपाल सिंह, नारायणनगर पश्चिमी (परौर)
हमारा रामगंगा के पार कटरी में खेत है। रामगंगा में आई बाढ़ से खेत में खड़ी उर्द और तिल की फसल सड़कर नष्ट हो गई, लेकिन लेखपाल कहते हैं कि मुआवजा देने लायक नुकसान नहीं हुआ।
-जयवीर सिंह, परौर
मेरा नारायणनगर पश्चिमी गांव के देवी मंदिर के निकट कीमती खेत था। रामगंगा की बाढ़ से तिल, उद्र, बाजरा की फसल नष्ट होने के साथ बीच में धारा आ जाने से खेत दो भागों में बंट गया है।
-सत्यपाल सिंह, मोहनपुर (परौर)
कलान तहसील से प्राप्त फसली नुकसान की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर संबंधित गांवों के किसान मुआवजा पाने के हकदार नहीं हैं। सर्वे में गन्ना की फसल पूरी तरह सुरक्षित पाई गई है। खेतों में फसलें पूरी तरह खराब नहीं हुई हैं। केवल शकरकंद की फसल को ज्यादा नुकसान बताया गया, लेकिन उसका रकबा भी सीमित है। बीमित फसलों का मुआवजा पाने के लिए किसान फसली बीमा करने वाली कंपनी को अपने दावे दे सकते हैं।
-गिरिजेश कुमार चौधरी, एडीएम फाइनेंस/प्रभारी, आपदा राहत प्रकोष्ठ