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सफर में बड़ी मुश्किल पैदा करते हैं अधूरे ओवर ब्रिज

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शाहजहांपुर। दिल्ली-लखनऊ हाईवे से गुजरना मुसीबतों से जूझने जैसा है। इन मुसीबतों की एक बड़ी वजह यहां के अधूरे ओवर ब्रिज भी हैं। अधूरे पड़े ओवरब्रिज का निर्माण दोबारा तो शुरू हुआ है। ये बन जाएं तभी जानिये। क्योंकि सालों से काम ठप है। निर्माण सामग्री और मिट्टी की वजह से सर्विस से निकलना मुश्किल होता है। रोड के गहरों गड्ढों से होकर निकलना मुश्किल होता है।
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बरेली-सीतापुर के बीच नेशनल हाईवे का निर्माण करीब तीन साल पहले रुका तो ओवरब्रिज का निर्माण कार्य भी अधर में लटक गया। चाहे बरेली मोड़ का ओवरब्रिज हो, मीरानपुर कटरा और तिलहर के ओवरब्रिज हों या फिर हरदोई मोड़ बाईपास का ब्रिज, यह सभी पुल अधूरे होने के कारण हवा में झूलते नजर आ रहे हैं। इन पुलों के दोनों ओर अभी तक मिट्टी कार्य पूरा नहीं हो सका है। बारिश में जाम की समस्या बढ़ने पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने मीरानपुर कटरा चौराहे और तिलहर के दो अन्य ब्रिज पर काम शुरू कर दिया लेकिन जाम की समस्या बढ़ा रही हुलासनगरा रेलवे क्रॉसिंग का ब्रिज अधूरा पड़ा है। ओवरब्रिज के बगल में बनी सर्विस लेन भी खस्ताहाल हो चुकी है इसलिए निर्माणाधीन पुलों के पास से गुजरते वक्त वाहनों की रफ्तार घटानी पड़ती है और इस कारण रोजा से कटरा तक के सफर में जाम नहीं होने पर भी एक-डेढ़ घंटा ज्यादा लग रहा है।
हरदोई बाईपास और बरेली मोड़ के पुल जानलेवा
बरेली मोड़ और हरदोई बाईपास पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज उपयोग मेें आने से पहले ही जानलेवा साबित होने लगे हैं। करीब दो वर्ष पहले तत्कालीन कार्यदायी संस्था (एरा इंफ्रा कंस्ट्रक्शन्स) के अभियंताओं की लापरवाही के कारण बरेली मोड़ पुल के पिलर पर क्रेन की सहायता से रखा जा रहा विशालकाय गार्डर का एक हिस्सा नीचे गिर जाने से उसकी चपेट में आकर कांट क्षेत्र के एक ग्रामीण की मौत हो गई और दो अन्य राहगीर घायल हो गए थे। बाद में कार्यदायी संस्था काम छोड़कर चली गई। तब से पुल कंक्रीट के दो पिलर्स पर रखा है। पुल के पास रूट डायवर्जन के लिए रखे गए भारी बोल्डर्स से अक्सर कोहरे के दौरान वाहन टकराने से दुर्घटनाएं होती हैं। हरदोई बाईपास चौराहा पर पुल के लिए पिलर्स बनाकर उस पर गार्डर रखे जा चुके हैं, लेकिन उसे दोनों ओर रोड से जोड़ा नहीं गया। चौराहा की रोड ऊंची-नीची और गड्ढे होने से भारी वाहन अक्सर लहराते हुए ओवरब्रिज के नीचे से गुजरते हैं। आसपास के दुकानदारों के अनुसार ऐसे मेें अक्सर पुल में कंपन होने लगता है।
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हुलासनगरा का अधूरा पुल बनना बेहद जरूरी
मीरानपुर कटरा। नेशनल हाईवे पर आधे अधूरे बने ओवरब्रिज लोगों की परेशानी का सबब बने हैं। जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो चुकी सड़क पर चलना पहले से कठिन बना हुआ है, क्रासिंग के दोनों ओर दो किमी तक हाईवे इतना जर्जर हो चुका है कि जरा सी असावधानी में वाहन पलटने का खतरा बना रहता है। ब्रिज नहीं बन पाने से रेलवे क्रासिंग पर आए दिन जाम की समस्या खड़ी हो जाती है। नगर के मुख्य चौराहे के ओवरब्रिज पर साइड पैनल लगाए जाने का काम शुरू किया जा चुका है, लेकिन क्रासगिं पर पुल निर्माण कब शुरू होगा, कुछ पता नहीं। वहीं हुलासनगरा क्रासिंग पर अभी तक सिर्फ पुल के पिलर खड़े करके लेवल निकालने का काम हो सका है।
जर्जर हो चुकी सर्विस लेन की मरम्मत नहीं
तिलहर। हाईवे पर बंथरा में ऑयल डिपो समेत कई गांवों का आवागमन देखते बनाए गए अंडरपास, नगर के बाईपास चौराहा और सरयू पुलिया मोड़ के निमार्णाधीन ओवरब्रिज पर काम तब शुरू कराया गया, जब बारिश में हाईवे के गड्ढे तालाबों में बदलने लगे। इन तीनों स्थानों पर निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए जेसीबी से मिट्टी के भराव और दोनों किनारों मेें कंक्रीट पैनल लगाने का काम होने लगा लेकिन पुलों के पास गड्ढे और दरारें पड़ने से जर्जर हो चुकीं सर्विस लेन की मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। यही वजह है कि जिला मुख्यालय से नगरिया मोड़ तक 15 किमी का सफर दस मिनट मेें पूरा हो जाता है लेकिन पुलों के पास पहुंचते ही रफ्तार बहुत कम हो जाती है। फिलहाल पुलों की दोनों साइडों को रोड से जोड़ने के लिए जेसीबी से मिट्टी समतल कराने के बाद उस पर गिट्टी की लेयर डाली जा रही है। एनएचएआई की कार्यदायी संस्था के इंजीनियर अभिषेक और राहुल ने बताया कि पुल की ऊंचाई तक गिट्टी की चार लेयर बिछाई जाएंगी, अभी तीसरी लेयर पर काम चला रहा है।
पुल बनाने को डाली गई मिट्टी बारिश में बहने से रोकने को दोनों साइडों में कंक्रीट पैनल लगाए जा रहे हैं और उन्हें अपनी जगह से खिसकने से रोकने को बेल्ट लगाए जा रहे हैं। बेल्ट लगाने के बाद मिट्टी और गिट्टी की निश्चित अनुपात मेें परतें बिछाई जाएंगी। पुल की ऊंचाई तक गिट्टी की चार लेयर बिछाई जाएंगी ताकि मिट्टी की ऊपरी परतें सुरक्षित रहें। उम्मीद है कि पुलों का निर्माण कार्य छह माह में पूरा हो जाएगा।
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-अभिषेक कुमार, वर्क इंजीनियर (एनएचएआई की कार्यदायी संस्था)
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