शहर में आग बुझाने के लिए 21 वाटर हाइड्रेंड लगाए गए थे, लेकिन वर्तमान में सभी सड़कों के नीचे दब गए हैं। तंग गलियों में अगर कोई हादसा हो जाए तो दमकलों को पानी लेने के लिए ओवर हेड टैंक या फिर ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ेगा। भीषण आग लगने पर गाड़ियों को पानी भरने के लिए काफी लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। ऐसे में भारी नुकसान हो सकता है।
फायर स्टेशन में गाड़ियों में पानी भरने के लिए एक वाटर हाइड्रेंड लगा हुआ है। इसके अलावा आपातकालीन स्थिति में पुराने जिला अस्पताल के पास बने ओवर हेड टैंक, जलालानगर में बने ओवर हेड टैंक और टाउनहाल के ओवर हेड टैंक से पानी लेना पड़ेगा। अगर शहर की तंग गलियों में कोई हादसा हो जाए तो पानी लेने के लिए दमकल गाड़ियों को ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ेगा। शहर में नगर पालिका की तरफ से 21 वाटर हाइड्रेंड लगे थे, जो वर्तमान समय में सड़क के नीचे दबकर खराब हो गए। शहर के तंग गलियों वाले क्षेत्र बहादुरगंज, चूड़ी वाली मार्केट, धर्मवीर मार्केट, मशीनरी मार्केट,कटियाटोला, बाडूजई प्रथम और द्वितीय, तारीन टिकली, चमकनी करबला, चौक, गुदड़ी बाजार आदि मोहल्लों में कोई हादसा हो जाता है तो फायर कर्मियों को पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।
हाइड्रेंड से छोटे वाटर पंप से बुझाई जा सकती आग
शहर में वाटर हाइड्रेंड इसलिए लगाए गए थे, कि तंग गलियों में छोटे वाटर पंप की मदद से पानी लेकर आग पर काबू पाया जा सकता है, लेकिन इनके खराब होने से काफी संकट खड़ा हो गया।
वाटर हाईड्रेेंड खराब होने से तंग गलियों में हादसा में होने पर समस्या उत्पन्न हो जाती है। पानी के लिए ओवर हेड टैंक और ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ता है। तंग गलियों के आसपास वाटर हाइड्रेंड की व्यवस्था होनी चाहिए।
- तेजवीर सिंह, सीएफएसओ