भगवान शरण के मुताबिक, मंगलवार की सुबह चार बजे यह घर में सो रहा था और उसकी पत्नी सुखरानी घर का दरवाजा खोलकर शौच के लिए गई थी। तभी उसके चाचा बाबूराम, पत्नी सोनमती और बेटे लक्ष्मण के साथ घर में घुस आए। जान से मारने की नीयत से उस पर चाकू से हमला किया, लेकिन चाकू पास में लेटी उसकी बेटी राधा के पेट में घुस गया। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घायल बच्ची को बंडा अस्पताल ले जाया गया। वहां हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
भगवान शरण का आरोप है कि उसका चाचा बाबूराम से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। तीन साल पहले चाचा ने उसके दादा इतवारी की तीन बीघा का चुपके से बैनामा कर दिया था और उसके पिता रामकुमार की डेढ़ बीघा जमीन पर जबरन कब्जा करना चाहते थे। इसे लेकर दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी, जिसमें उनका चचेरा भाई रंजीत घायल हो गया था। घटना के चार दिन बाद उसकी मौत हो गई थी। मामले में चाचा ने भगवान शरण और इसके पिता के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। भगवान शरण तो पहले छूट गया था जबकि रामकुमार की जमानत तीन माह पहले ही हुई। आरोप है कि 15 दिसंबर को चाचा और उनके लड़के लक्ष्मण ने बांका से हमला करके भाई मुकेश को घायल कर दिया था लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी। इसने कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने के लिए अर्जी डाली थी।
इस मामले में बाबूराम का कहना है कि मुकदमे में राजीनामा करने का दबाव बनाने की नीयत से चार माह की बच्ची को घायल करने का आरोप लगाया जा रहा है। एसओ राजीव मिश्रा ने बताया कि घटना के संबंध में कोई तहरीर नहीं मिली है लेकिन पूरे मामले की अपने स्तर पर जांच कराई जा रही है कि असल वजह क्या रही थी और बच्ची के पेट में धारदार हथियार का घाव कैसे हुआ।