शहर के मोहल्ला दिलाजाक में वह पत्नी शबनम बानों और दो बेटों मो. सैफ और सुहेल के साथ रहते हैं। उनकी अब तक चार पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। इसमें उर्दू गजलों का संग्रह लमसे शबनम और लरजते साए तथा हिंदी गजल संग्रह धड़कन और ठंडी हवा के झोके शामिल हैं। मिर्जा गालिब पुरस्कार के बावत खिजर बोले कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि उनकी मेहनत का सिला ऊपर वाला इस रूप में देगा। परिवार ही नहीं, मित्र और विभागीय अधिकारी और कर्मचारी भी बहुत खुश हैं। खिजर ने मुफलिसी को इस तरह शब्दों में बांधने का काम किया कि मुफलिसी ने मेरे हालात बिगाड़े कैसे, देखिए अबके गुजरते हैं ये जाड़े कैसे। सच है चौखट से नहीं होती है हिफाजत घर की, तंग हाली है लगाओगे किबाड़े कैसे।
इसी तरह मौजूदा हालात पर उन्होंने लिखा कि सुकून-ए-दिल की बातें अब फकत ख्वाबों की बातें हैं, घरों में आ गए हों बम तो कैसे नींद आएगी।