पेड़ों की जड़ से ऊपर का हिस्सा गायब
इसके बाद चीफ कंजरवेटर सिहुरा वन चौकी पहुंचे और काटे गए पेड़ों की जंगल से बची हुई बरामद लकड़ी को देखा। उन्होंने मौके पर पड़े मिले बोटों का काटे गए पेड़ों से मिलान करने के निर्देश दिए। काटे गए पेड़ों की जड़ से ऊपर का हिस्सा गायब है। पेड़ के ऊपरी हिस्से को पेड़ काटने वाले मौके पर ही छोड़ गए थे, जिसे वन चौकी पर लाया गया है। जंगल से कुल 60 बोटे चौकी पर लाए गए हैं। बरामद लकड़ी पर नंबर नहीं होने पर भी चीफ कंजरवेटर ने कड़ी नाराजगी जताई है।
चीफ कंजरवेटर ने पेड़ काटे जाने के मामले के खुलासे के लिए खुद अपनी उड़नदस्ता टीम, कंजरवेटर के उड़न दस्ता प्रभारी रमाकांत सक्सेना, शाहजहांपुर के रेंजर शत्रुघ्न प्रसाद और खुटार रेंजर की टीम का गठन किया गया है। टीमों के सहयोग के लिए वन दरोगा हीरालाल, कामता प्रसाद और रमेश कुमार को भी लगाया गया है। चीफ कंजरवेटर ने बताया कि मामले की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
वनकर्मियों की मिलीभगत की चर्चा
सिहुरा बीट के हाईवे किनारे जंगल से कोरों के 13 पेड़ काटे जाने के मामले में कुछ वनकर्मियों की संलिप्तता की भी चर्चा चल रही है। जंगल के पास दो गांवों में लकड़ी का व्यापार करने वाले तमाम ठेकेदार भी रहते हैं। कटान में इनका हाथ होने की चर्चा है। चर्चा है कि कुछ वनकर्मियों की मिलीभगत से काटे गए पेड़ों की लकड़ी किसी कर्मचारी के घर गैर जनपद में भेजी गई है।
सात दिन तक नहीं हुई कोई कार्रवाई
चीफ कंजरवेटर की जांच में सामने आया है कि पेड़ सात जनवरी को काटे गए हैं। 13 जनवरी तक पेड़ कटान के मामले में कोई कार्रवाई नहीं होना रेंज कार्यालय में तैनात वनकर्मियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है। चीफ कंजरवेटर की ओर से खुलासे के लिए लगाई गई उड़नदस्ता टीमें भी इसी बिंदु पर जांच को आगे बढ़ा रही हैं। इससे विभाग के स्थानीय अधिकारी, कर्मचारी भी संदेह के घेरे में आ गए हैं।
चीफ कंजरवेटर ने मौके पर कार्रवाई के बारे में जानकारी चाही तो कोई कार्रवाई नहीं होने का जवाब सुनकर उन्होंने कई सवाल उठाए। इससे यह साबित हुआ कि कटान के बड़े मामले को वनकर्मी निपटाने के प्रयास में थे। काटे गए पेड़ों की मोटी और कीमती लकड़ी को किसी वाहन से ले जाया गया होगा और छोटी बोटें मौके पर ही छोड़ दी गई, जिससे इन्हें लकड़ी बीनने वाले उठा ले जाएंगे और मामला निपट जाएगा।