शाहजहांपुर। शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप माता महागौरी की पूजा-अर्चना की गई। पावन अवसर पर हर तरफ वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन की गूंज रही। श्रद्धालुओं ने माता रानी के चरणों में श्रद्धा एवं भक्तिभाव से शीश नवाकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगलमय जीवन की कामना की।
कालीबाड़ी मंदिर, काली माता मंदिर, बाबा विश्वनाथ मंदिर, दुर्गा देवी मंदिर, कृष्णानगर मंदिर में सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। इसी क्रम में पुलिस चौकी उस्मान बाग स्थित श्री रुद्र बाला जी धाम में पूजा-अर्चना की गई। पूजन के उपरांत धाम में महिला मंडल ने संकीर्तन का आयोजन किया। इसमें महिला मंडल ने माता रानी की महिमा का गुणगान करते हुए भक्तिमय भजनों और धार्मिक छंदों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर सभी को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
श्री रुद्र बाला जी धाम के पुजारी पंडित कान्हा कृष्ण शुक्ल ने महागौरी के दिव्य स्वरूप के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नवरात्र की अष्टमी तिथि पर माता की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख, शांति के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मंदिर में हुए संकीर्तन और पूजन अनुष्ठान में डॉ. शालू अवस्थी, सुनीता गर्ग, अलका अरोड़ा, रीमा, मधु, डिंपल, किरण, छाया का सहयोग रहा।
सप्तमी व अष्ठमी को लेकर रहा संशय
रविवार को सप्तमी और अष्ठमी को लेकर भ्रम की स्थिति रही। इसके चलते लोगों ने आचार्यों से संपर्क साधकर मार्गदर्शन लिया। पंडित डॉ.कान्हा कृष्ण शुक्ला बताते हैं कि सूर्योदय से पहले अष्टमी लग गई थी।
ओसीएफ में 71वें दुर्गा पूजा महोत्सव का शुभारंभ
शाहजहांपुर। ओसीएफ फैक्टरी परिसर स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में 71वें दुर्गा पूजा महोत्सव का शुभारंभ महाप्रबंधक श्रीकांत एस. दोईफोडे ने किया। 21 अक्तूबर तक चलने वाले महोत्सव में ओसीएफ कर्मी पूरे उत्साह के साथ सहयोग कर रहे हैं।
महोत्सव के दौरान सुबह मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ भंडारे का आयोजन किया जाता है। शाम को संध्या आरती के साथ बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। बंगाली परंपरा के अनुसार, महिलाओं और बच्चों की ओर से धुनुची नृत्य भी प्रस्तुत किया। मां के भोग की जिम्मेदारी नीतू अधिकारी, सुजया किरण, पदमा, सरिता, नीलम, गीता शर्मा ने संभाली। दूसरी ओर कालीबाड़ी मंदिर में मां दुर्गा का पूजन किया गया। शाम को मंत्रोच्चारण कर मां की आराधना की गई। इसके बाद आरती की गई। संवाद
अष्टमी पर कृष्णानगर मंदिर में हवन-पूजन करते श्रद्धालु। संवाद
अष्टमी पर कृष्णानगर मंदिर में हवन-पूजन करते श्रद्धालु। संवाद
अष्टमी पर कृष्णानगर मंदिर में हवन-पूजन करते श्रद्धालु। संवाद