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Shahjahanpur News: चलत मोहि चूड़ामनि दीन्ही। रघुपति हृदयं लाइ सोइ लीन्ही...

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कुर्रिया कलां  में  श्रीराम- सुग्रीव की मित्रता का मंचन करते कलाकार।संवाद
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शाहजहांपुर। ओसीएफ स्थित रामलीला में लंका दहन के बाद माता सीता का पता लगाकर लौटने और श्रीराम को मां सीता की चूड़ामणि सौंपने व लंका से विभीषण को अपमानित कर देश निकाला की लीला मंचित की गई। रंग-बिरंगी लाइटों और आकर्षक म्यूजिक से मंचन पर किरदार जीवंत हो गए।
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रविवार को मंचन में हनुमानजी माता सीता से भेंट कर उनकी चूड़ामणि लेकर प्रभु श्रीराम के पास पहुंचे। गोस्वामी तुलसीदास ने इस प्रसंग का वर्णन करते हुए लिखा है-
चलत मोहि चूड़ामनि दीन्ही। रघुपति हृदयं लाइ सोइ लीन्ही
नाथ जुगल लोचन भरि बारी। बचन कहे कछु जनककुमारी।।
अर्थात- जब हनुमान जी अशोक वाटिका में माता सीता से विदा लेकर लौटने लगे, तब उन्होंने कहा-हे नाथ! अशोक वाटिका से चलते समय माता सीता ने मुझे अपनी चूड़ामणि दी। श्रीराम ने उसे हाथों में लेकर अपने हृदय से लगा लिया। दूसरी ओर सोने की लंका के दहन व खर-दूषण, त्रिशिरा और अक्षय कुमार के वध से व्याकुल रावण को नारायण के अवतार लेने की आशंका सताने लगी।
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इसी बीच विभीषण ने रावण को समझाया। तब क्रोधित रावण ने भरी सभा में विभीषण का अपमान कर उन्हें लंका से देश निकाला दे दिया। इसके बाद विभीषण प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचे। इससे पहले वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने देव स्वरूपों की आरती की। मंचन सचिव ए के व्यास, देवेश दीक्षित, संयुक्त सचिव अजय सक्सेना, निर्देशक अंकित सक्सेना, प्रभारी महेंद्र दीक्षित आदि मौजूद रहे।

मेघनाद ने लक्ष्मण को किया मूर्छित, रामादल में छाया मातम

शाहजहांपुर। खिरनीबाग स्थित श्रीरामलीला मैदान पर नव चेतना कला परिषद के कलाकारों ने सेतु निर्माण, शिव आराधना, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति के प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया।
मंचन में लंका पहुंचने के बाद भगवान राम ने अंगद को दूत बनाकर रावण के पास भेजा। अंगद ने रावण को समझाने का प्रयास किया। रावण के नहीं मानने पर रामदल ने लंका पर आक्रमण कर दिया। रावण की ओर से युद्धभूमि में पहुंचे मेघनाद ने वानर सेना में हाहाकार मचा दिया। लक्ष्मण ने मेघनाद से युद्ध किया, लेकिन मेघनाद ने उन पर शक्तिबाण चला दिया। इससे लक्ष्मण मूर्छित होकर गिर पड़े।
हनुमान लक्ष्मण को रामदल में लेकर पहुंचे। विभीषण के सुझाव पर हनुमान लंका से वैद्य सुषेण को ले आए। वैद्य ने लक्ष्मण के उपचार के लिए संजीवनी बूटी लाने के लिए कहा। बूटी की पहचान नहीं होने पर हनुमान पूरा पर्वत ही उठा लाए। इसके बाद वैद्य सुषेण ने लक्ष्मण का उपचार कर उन्हें जीवनदान दिया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, सांसद अरुण सागर, राज्यसभा सांसद मिथिलेश कठेरिया ने आरती की। संवाद
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श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का मंचन किया
कुर्रियाकलां। चौहनापुर की रामलीला में श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का मंचन किया गया। आदर्श रामलीला समिति के सदस्यों ने किष्किंधा कांड में वर्णित अत्यंत पवित्र और आदर्श मित्रता को दर्शाया। मंचन में दिखाया कि हनुमान जी ने प्रभु राम और सुग्रीव की मुलाकात ऋष्यमूक पर्वत पर कराई।
सुग्रीव अपने भाई बाली के डर से वहां रहते थे। श्रीराम और सुग्रीव ने अग्नि देव को साक्षी मानकर एक-दूसरे को मित्र बनाया और वचन दिया कि वे सुख-दुख में हमेशा साथ रहेंगे। इस बीच बाली वध का मंचन भी किया गया। मंचन के अंत में पूर्व जिला पंचायत सदस्य नीरज मिश्रा ने देवस्वरूपों की आरती उतारी। व्यवस्था में गौतम प्रसाद पांडेय, जगदीश मिश्र, सूरज सिंह,नंदकिशोर अवस्थी, रचित सिंह, नमन त्रिपाठी का सहयोग रहा। संवाद
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हनुमान जी ने जलाई सोने की लंका



पुवायां। नगर में चल रही रामलीला में लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। हनुमान जी के सोने की लंका जलाने का दृश्य देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे।



कलाकारों ने शानदार अभिनय के माध्यम से अशोक वाटिका और लंका दहन प्रसंग को जीवंत कर दिया। रामलीला में कलाकारों ने मंचन किया कि माता सीता की खोज करते हुए हनुमान जी लंका पहुंचते हैं। वहां उनकी मुलाकात माता सीता से होती है। इसके बाद फल खाने और पेड़-पौधे तोड़ने की जानकारी पाकर रावण का पुत्र मेघनाद उन्हें पकड़कर रावण के दरबार में ले जाते हैं।



रावण के आदेश पर हनुमान जी की पूंछ में आग लगा दी जाती है। इसके बाद हनुमान जी अपनी जलती पूंछ से सोने की लंका में आग लगा देते हैं। देखते ही देखते लंका धू-धूकर जलने लगती है। लंका दहन का मंचन देखकर दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। संवाद

कुर्रिया कलां  में  श्रीराम- सुग्रीव की मित्रता का मंचन करते कलाकार।संवाद

कुर्रिया कलां  में  श्रीराम- सुग्रीव की मित्रता का मंचन करते कलाकार।संवाद

कुर्रिया कलां  में  श्रीराम- सुग्रीव की मित्रता का मंचन करते कलाकार।संवाद

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