सीडीओ से गुस्साए अधिवक्ताओं ने किया चक्का जाम
सीडीओ से गुस्साए सेंट्रल बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने शुक्रवार को कचहरी तिराहे पर धरना-प्रदर्शन कर जाम लगा दिया। धरने के दौरान अधिवक्ता राजाराम मिश्रा एडवोकेट से अभद्रता करने का आरोप सीडीओ पर लगा रहे थे। डीएम के सामने बातचीत के दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी भी हुई। बाद में सीडीओ के कसम खाने पर अधिवक्ता शांत होकर चले गए और जाम व धरना प्रदर्शन खत्म कर दिया। सेंट्रल बार की घोषणा के अनुरूप सुबह 11 बजे अधिवक्ता अपने बिस्तर छोड़कर कचहरी के पीडब्ल्यूडी तिराहे पर टेंट लगाकर धरना-प्रदर्शन करने को जमा होने लगे। उन्होंने रेलवे फ्लाईओवर और एकेसी बजाज शोरूम के पास रोड पर रस्सियां बांधकर वाहनों रोड बंद कर दिया। यहां शुरू हुए धरने पर अधिवक्ताओं ने सीडीओ पुलकित खरे पर तीखे वाक् प्रहार किए। इसका पता लगने पर सिटी मजिस्ट्रेट नरेंद्र सिंह ने धरना स्थल पर जाकर अधिवक्ताओं को मनाने का प्रयास किया, लेकिन अधिवक्ता नहीं माने। इस बीच अफसरों के निर्देश पर वीडियोग्राफी करने पहुंचे सिपाही धर्मवीर से अधिवक्ता उलझ गए और वीडियोग्राफी करने से रोक दिया। दोपहर करीब डेढ़ बजे डीएम पुष्पा सिंह के आमंत्रण पर अधिवक्ताओं का शिष्टमंडल बार अध्यक्ष आलोक द्विवेदी के नेतृत्व में वार्ता करने पहुंचा। डीएम के कहने पर अधिवक्ताओं ने राजाराम मिश्रा एडवोकेट को भी बुला लिया। बाद में अधिवक्ताओं के आग्रह पर सीडीओ को भी बुला लिया गया। डीएम के सामने दोनों पक्षों के बीच उस समय बहस होने लगी जब अधिवक्ताओं ने सीडीओ पर बिना शर्त माफी मांगने का दबाव बनाया। सीडीओ ने कहा कि बार संस्था और उसके समस्य सदस्यों के प्रति उनके मन में बेहद सम्मान है, लेकिन सीतापुर आई हॉस्पिटल के प्रकरण को बार से जोड़ा जाना ठीक नहीं है। अधिवक्ता राजाराम मिश्रा सीडीओ द्वारा अपमानित किए जाने के कथन पर अड़े थे। आखिर में सीडीओ ने ईश्वर की सौगंध खाते हुए दोहराया कि 17 मई को अधिवक्ता मिश्रा से उनकी भेंट ही नहीं हुई, इसलिए उनसे अभद्रता का कोई सवाल नहीं उठता। सीडीओ के कसम खाने और बार के प्रति सम्मान प्रकट करने पर अधिवक्ता भी शांत हो गए और इसके बाद जाम खोलने के साथ ही धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। वार्ता में महेश चंद्र द्विवेदी, उमेश सिंह चौहान, बृजेश मिश्र, नंद किशोर अवस्थी, अभय यादव, अनुज सिंह, प्रताप सिंह आदि शामिल रहे।
धरने के दौरान जाम रहे कई चौराहे
अधिवक्ताओं के जाम लगाने पर फ्लाईओवर पर निगोही, पुवायां रोड से आने वाले वाहन जाम में फंस गए। कचहरी से रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले वाहनों की जीआईसी तिराहे तक कतारें लगने लगीं। जाम में रोडवेज की कई बसें भी फंस गईं। इसका पता लगने पर एसपी डॉ. मनोज कुमार के निर्देश पर सीओ ट्रैफिक ने वाहनों को निकालनेे के लिए रूट डायवर्जन करके खिरनीबाग चौराहा से रास्ता दिया। नतीजा यह हुआ कि शहर के सदर चौराहा, पंखी चौराहा, इस्लामियां तिराहा, बहादुरगंज मेन मार्केट, लाल इमली चौराहा आदि स्थानों पर जाम लगने लगा। अधिवक्ताओं के जाम खोलने के काफी देर बाद ही यातायात सुचारु हो सका।
धरना-प्रदर्शन के पीछे वजह कुछ और है: सीडीओ
सीडीओ पुलकित खरे ने बताया कि अधिवक्ता राजाराम मिश्र को सीतापुर आई हास्पिटल प्रबंध समिति का वरिष्ठ उपाध्यक्ष डीएम राजमणि यादव ने अपने कार्यकाल में नामित किया था। बाद में डीएम शुभ्रा सक्सेना ने अपने कार्यकाल में अस्पताल प्रबंध समिति की बैठक की अध्यक्षता करने का दायित्व पदेन सचिव के नाते उनको सौंप दिया, लेकिन मीटिंग के दिन समिति की ओर से डीएम को पत्र भेजकर अध्यक्षता का भार सीडीओ को सौंपे जाने पर आपत्ति की गई और इसी आधार पर बैठक रद्द हो गई। सीडीओ ने बताया कि इस दौरान उन्हें अस्पताल से जुड़ी भुगतान की दो आपत्तिजनक पत्रावलियां प्राप्त र्हुइं। एक फाइल दवा की नौ एजेंसियों को 2.17 लाख रुपये के भुगतान से संबंधित थी, और दूसरी फाइल मुफ्त मिलने वाले चश्मों के भुगतान से संबंधित थी। नियमत: 20 हजार रुपये तक सीधा भुगतान संभव है। एक लाख रुपये तक की खरीद को कुटेशन मांगे जाने और इससे अधिक के भुगतान पर टेंडर जारी करने का प्रावधान है।
सीडीओ के अनुसार दवा भुगतान की पत्रावली में टेंडर प्रक्रिया स्पष्ट नहीं की गई। चश्मों की फाइल की जांच से पता चला कि एक ही व्यक्ति को कई साल से इसका ठेका दिया जा रहा है। अस्पताल परिसर की दुकानों का आवंटन भी खुले तौर पर नहीं किया गया। डीएम विजय किरन आनंद के कार्यभार लेने पर आपत्तियों सहित दोनों फाइलें डीएम को सौंपकर वह एक सप्ताह के अवकाश पर चले गए। उनके छुट्टी पर जाने के बाद आयु और अस्वस्थता के आधार पर समिति से इस्तीफा दे चुके राजाराम मिश्र ने डीएम आनंद से समिति में अपनी वापसी करा ली। सीडीओ ने कहा कि राजाराम मिश्र को 17 मई को हुए अपने अपमान का बोध 24 मई को तब हुआ जब दोनों फाइलें आपत्तियों सहित उन्हें लौटा दी गईं।