द्वितीय शनिवार को अवकाश के कारण उमड़ी भीड़
बैंकों में भुगतान न मिलने पर एटीएम पर लगीं लाइनें
केंद्र सरकार की नोटबंदी के बाद से करेंसी की कमी से जूझ रहीं अधिकांश बैंक शाखाएं सप्ताह के आखिरी दिन यानी शुक्रवार को भुगतान की मांग बढ़ने से दोपहर बाद ही कैशलेस हो गईं। लाइनों में लगे उन सभी लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया, जिन्हें भुगतान नहीं मिल सका। इससे पहले, बैंकों में उमड़ी भीड़ को मैनेज करने के लिए शाखा प्रबंधकों ने भुगतान में कटौती की और तमाम विड्रॉल फॉर्म अगले दिन स्वीकृत करने को रोक लिए।
जिले में विभिन्न बैंकों की 252 शाखाएं होने के बावजूद अधिकांश कैशलेस होने से उनके भुगतान काउंटर दिन भर सूने पड़े रहे। इस बीच, तमाम शाखाओं ने उपलब्ध रोकड़ से चेकों और विड्रॉल फॉर्मों से भुगतान किया, लेकिन एक अनार-सौ बीमार वाली स्थिति बनती देख शाखा प्रबंधकों ने अधिकतम लोगों को नकदी उपलब्ध कराने के लिए भुगतान में कटौती करनी शुरू कर दी। 24 हजार रुपये के विड्रॉल वालों को आठ-दस हजार रुपये देकर बाकी रकम अगले सप्ताह निकालने की सलाह देकर लौटा दिया गया।
शहर में एसबीआई की मेन ब्रांच, गोविंदगंज स्थित बॉब की मुख्य शाखा और इलाहाबाद बैंक सहित पुवायां स्थित एसबीआई केएनएसबी शाखा में ब्रांच मैनेजर अवनीश गुप्ता ने भुगतान की यही पद्धति अपनाई। शाखा प्रबंधक गुप्ता के अनुसार ब्रांच को रोजाना कम से कम 20 लाख रुपये की कैश की जरूरत है, लेकिन भुगतान के लिए दो दिन में पांच लाख रुपये की करेंसी मिल रही है।
शिक्षकों और विभिन्न विभागों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन भुगतान में भी कटौती की गई। इसके बावजूद दोपहर लंच टाइम के बाद से कैश खत्म होने के साथ बैंक शाखाओं में कैश खत्म होने लगा। इसी के साथ वे लोग हंगामा करने लगे, जिन्हें घंटों लाइनों में लगने के बावजूद नगदी नहीं मिल पाई। बैंकों में नो कैश के बोर्ड टंगने के साथ ही चालू हालत वाले एटीएम पर कतारें लगने लगी। लोग दिन ढलने के बाद रात तक कड़ाके की सर्दी में लाइनों में लगे रहे।