शाहजहांपुर। परिवहन निगम की बसों में सफर करना जितना मुश्किल है, उतना ही असुरक्षित भी है। रोडवेज के बेडे़ में शामिल निगम की बहुत सी बसें अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। फिर भी इन्हें यात्रियों को लाने-ले जाने में लगा रहा खा है। ये बसें आए दिन डिपो में मरम्मत के लिए खड़ी हो जाती हैं। किसी में टायर खराब हो जाता है, किसी का पहिया ही निकल गया है। कोई इंजन न बनने के कारण खड़ी हो चुुकी हैं।
इस वजह से उनका चलना संभव नहीं है। जो बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं, उनमें मेडिकल किट, अग्निशमन यंत्र जैसे सुरक्षा उपकरण नहीं हैं। संविदा कर्मियों की मानें तो बसों के जरूरी सामान ही उपलब्ध नहीं कराया जाते। छोटी मोटी कमी होने पर अपनी जेब से खर्च कर ठीक कराना पड़ता है। शुक्रवार को रोडवेज बस स्टैंड और डिपो में बसों का हाल जाना तो यात्रियों को सुविधाजनक सफर देने के दावा की पोल खुल गई।
नहीं मिले सुरक्षा उपकरण
रोडवेज बस स्टैंड पर निगम की एक बस में न तो मेडिकल किट लगी मिली और न ही अग्निशमन यंत्र ही लगा था। बस के चालक से सुरक्षा उपकरणों के के बारे में पूछा तो वह टालमटोल करने लगा। बस स्टैंड कार्यवाहक प्रभारी भी सुरक्षा उपकरण की अनुपलब्धता को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। अन्य बसों में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं था, कुछ में अग्निशमन यंत्र नहीं था।
गल चुकी बॉडी, दरवाजे-खिड़कियों के शीशे ढीले
निगम की बसें पुरानी हो जाने की वजह से रोडवेज बस स्टैंड पर ही खड़ी बसों की बॉडी भी गली मिली। दरवाजे-खिड़कियों के शीशे ढीले मिले। चालकों का कहना था कि सड़कों की हालत खस्ता होने की वजह से बसों की हालत भी खराब हो चुकी है। बसों का रजिस्ट्रेशन नंबर के हिसाब से हर महीने सर्विस का प्रावधान है, लेकिन ऐसा न होने की वजह से इनकी स्थिति दयनीय हो चुकी है।
मरम्मत के लिए डिपो में खड़ी मिलीं दो दर्जन बसें
रोडवेज बसों के वर्कशॉप पर 24 से अधिक बसें मरम्मत के लिए खड़ी मिलीं। हालांकि विभाग के रिकॉर्ड में खराब बसों की संख्या 15 ही है। एक कर्मचारी बस के पहिये की किंग पिन बदल रहा था। दूसरा कर्मचारी इंजन खोलकर बैठा मिला। कर्मचारी ने बताया कि अधिकांश बसों में अगले पहिये कि किंग पिन खराब है, लेकिन सालों-साल बदली नहीं जाती। जबकि इससे पहिये के निकलने का डर बना रहता है। एक संविदा कर्मी ने बताया कि फोरमैन द्वारा बसों की सर्विस पर ध्यान नहीं दिया जाता, कोई छोटी-मोटी कमी होने पर खुद ही ठीक कराकर गाड़ी चलाते है। वरना रोटी चलाना भी मुश्किल हो जाएगा।
स्टेयरिंग जाम, पंप नहीं चलता, और सटी खराब
देखरेख के अभाव में रोडवेज के बेडे़ में शामिल निगम की बसों में किसी के पहिये निकल गए हैं। किसी में बैटरी खराब होने चुकी है। टायर-ट्यूब भी मिलना मुश्किल हो जाता है। ज्यादातर बसों को पुराने टायरों पर ही चलाया जाता है। स्टेयिरिंग जाम, पंप नहीं चलता, सीटें खराब हो चुकी है।
वर्तमान में 15 बसें डिपो में खड़ी हैं, जिनकी मरम्मत का काम होना है। ज्यादातर बसें में छोटी-मोटी समस्या है, जिसको ठीक करके बस चला दी जाएगी। बसों के लिए कलपुर्जों की कोई समस्या नहीं है। - राजकुमार गौतम, डिपो सीनियर फोरमैन
शाहजहांपुर के रोडवेज बस स्टेशन पर यात्रियो के इंतजार में खड़ी बसें । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR