शहीदान-ए-करबला की याद में रखे गए ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इस अवसर पर जगह-जगह सबीलें सजाकर लंगर तकसीम किए गए।
चेहल्लुम के मौके पर घरों में रखे ताजिए देखने के लिए रात को मुस्लिम समुदाय के लोग उमड़ पड़े। महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और युवाओं ने देर रात तक शहर में घूमकर ताजियों को देखा। बिजली की रंग-बिरंगी झालरों और दूधिया रोशनी से जगमगाते ताजिये देखकर लोगों ने लंगर भी छका। दिन इन ताजियों को करबला में दफन किया गया। गली-मोहल्लों से निकले मन्नतों वाले ताजिये दफनाने को बच्चों और युवाओं की कतारें लगी रहीं। सुबह दस बजे के बाद से अकीदतमंदों का ताजिया लेकर करबला पहुंचना शुरू हो गया था।
करबला को जाने वाले विभिन्न रास्तों पर ताजियों के जुलूस दिखाई दे रहे थे। यह ताजिए चेहल्लुम से एक दिन पहले लोगों ने करबला में शहीद होने वाले हजरत इमाम हुसैन की याद में घरों में रखे थे। इसके अलावा
लोगों ने सबीलें लगाईं और लंगर भी तकसीम किया। चमकनी स्थित करबला व जलालनगर में शाम तक ताजिए दफन करने का सिलसिला चलता रहा। बाडूजई प्रथम, बिजलीपुरा, अंटा चौराहा, हयातपुरा आदि क्षेत्रों के ताजियों को चमकनी करबला में तथा जलालनगर, निगोही रोड, दिलाजाक आदि स्थानों से उठाए गए ताजिए गदियाना कब्रिस्तान ने दफन किए गए।
चमकनी करबला क्षेत्र मेेंमेले का आयोजन किया गया। कमेटी सचिव फसी उल्ला, नायब सचिव मो. रजी की देखरेख में मो. आमिर, मो. आकिब, मोनी, अनवार, नाजिर अली, मो. शोऐब आदि देखरेख में ताजिए दफनाए गए।