मोदी सरकार के आम बजट की समाज के विभिन्न वर्गों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। प्रबुद्धजनों समेत महिलाओं और व्यापारी वर्ग ने आयकर छूट सीमा बढ़ाने के साथ कर रियायत को मध्य आय वर्ग के लिए राहत भरा कदम बताया, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र के लिए किए प्रयास को उद्यमियों ने अपर्याप्त ठहराया। आम बजट पर विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाएं उन्हीं की जुबानी।
उद्योगपतियों का नजरिया
उद्योगों को लाभान्वित करने के लिए बजट में अलग से फोकस किया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया। हालांकि, प्रॉफिट टैक्स में कमी और आयकर छूट सीमा बढ़ने से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन उद्योगों को बढ़ावा देने वाले उपाय किए जाने चाहिए। -रामचंद्र सिंघल, राइस मिलर
कंपनी उद्योगों के लिए बजट में कोई विशेष राहत नहीं दी गई जो कि निराशाजनक है। सालाना 50 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाली कंपनियों को लाभ कर में सिर्फ पांच फीसदी की रियायत कोई बड़ा तोहफा नहीं कहा जा सकता। -अशोक अग्रवाल, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, आईआईए
व्यापारियों का नजरिया
तीन लाख रुपये से अधिक ट्रांजक्शन ई-पेमेंट से करने संबंधी बाध्यता थोपकर बजट मेें एक तरह से व्यापारी वर्ग पर शिकंजा कसा गया है। कपड़ा की थोक मंडी में सारा लेन-देन कैश में होता है। इनकम टैक्स स्लैब बढ़ने से थोड़ी राहत जरूर मिलेगी। -कुलदीप सिंह दुआ, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल, मिश्रा गुट
व्यापारी वर्ग लंबे समय से आयकर छूट सीमा में बढ़ोत्तरी का इंतजार कर रहा है और यह आकांक्षा मोदी सरकार के आम बजट ने पूरी कर दी है। रही बात ई-पेमेंट की, तो इससे व्यापारियों को किसी तरह की असुविधा नहीं होगी।-सचिन बाथम, नगर अध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल, कंछल गुट
किसानों का नजरिया
किसानों को बजट से बड़ी उम्मीदें थीं। बजट में किसानों के साथ छलावा किया गया है। किसानों का एक वर्ष तक का कर्ज माफ किया जाना चाहिए था। पूरे देश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। किसानों की उम्मीदों पर केंद्र सरकार ने पानी फेर दिया है। -महेंद्रपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष भाकियू शाहजहांपुर
केंद्र सरकार ने किसान हितैषी बजट पेश किया है। कर्ज पर ब्याज माफी और 10 लाख रुपये तक का कर्ज दिया जाना अच्छा कदम है। बजट घोषणाओं को जल्द ही लागू भी किया जाना चाहिए। उम्मीद है कि केंद्र सरकार किसानों केे हित में आगे भी काम करती रहेगी। - आदित्यप्रकाश त्रिवेदी, निवासी ग्राम चांदपुर, खुटार
प्रबुद्ध वर्ग का नजरिया
नोटबंदी के बाद जो सरकार से अपेक्षाएं थीं, उन पर बजट खरा नहीं उतरा। हालांकि मध्यमवर्गीय को आय में पांच प्रतिशत का लाभ देकर अच्छा काम किया गया है। व्यवसाय को प्रोत्साहित करने की कोई योजना न होना चिंताजनक है। शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष फंड आवंटित नहीं किया गया है।- डॉ. अवनीश मिश्र, प्राचार्य एसएस कॉलेज, शाहजहांपुर
आम बजट और रेल बजट संतुलित है। खासतौर पर मध्यम वर्गीय करदाताओं को राहत देने का काम किया गया है। राजनीतिक दलों को चंदा के रूप में दो हजार तक सीमा तय करना सराहनीय कदम है। वहीं, रेल बजट में ई-टिकट पर सर्विस चार्ज समाप्त किया जाना भी अच्छा कदम है।- अमरीश सक्सेना, वरिष्ठ आयकर अधिवक्ता, शाहजहांपुर
महिलाओं का नजरिया
बजट में वेतनभोगियों को काफी राहत दी गई है। मध्यम वर्ग को संतुष्ट किया गया है, जो अच्छी बात है। केंद्र सरकार ने चिकित्सा, कृषि आदि को भी सहूलियत दी है।- प्रीति छाबड़ा, प्रवक्ता जीजीआईसी
मध्यम वर्ग के लिए उपयुक्त बजट है। सभी को खुश करने की कोशिश की गई है। आयकर में छूट की उम्मीद अधिक थी, लेकिन जो छूट दी गई है वह संतोषजनक है। - गीता शुक्ला, दुर्गा कॉलोनी हथौड़ा बुजुर्ग
राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों का नजरिया
मोदी सरकार के बजट से उम्मीद थी कि काला धन की निकासी के बाद गरीब तबके के लोगों को मालामाल करने वाले प्रावधान किए जाएंगे। प्रधानमंत्री ने जनता को इसी तरह के सब्जबाग दिखाए थे। आयकर स्लैब में मामूली बढ़ोत्तरी ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है। -कौशल मिश्रा, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
यह बजट गरीबों, किसानों और मध्य आय वर्ग वालों के लिए है, अमीरों के लिए नहीं। बजट में गरीबों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। यह देश के नवनिर्माण का बजट है, जो आने वाले समय में देश को सकारात्मक परिवर्तन की ओर ले जाएगा। -राकेश मिश्रा, जिलाध्यक्ष, भाजपा
झूठ बोलकर सत्ता में आई मोदी सरकार ने बजट के बहाने जनता को गुमराह करने की एक बार फिर कोशिश की है। युवाओं, उद्योगों, व्यापार जगत आदि को अनदेखा किया गया। किसानों को ऋण का लालच देने के बजाय फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाना चाहिए। -तनवीर खां, जिलाध्यक्ष, सपा
नोटबंदी के बाद से केंद्र सरकार आम आदमी को नगर भुगतान के मामले में अभी तक कोई खास राहत नहीं दे पाई। इसीलिए तीन लाख से अधिक कैश पेमेंट पर प्रतिबंध थोपा गया है। बजट में गरीब आदमी के हितों की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। -उदयवीर सिंह, जिलाध्यक्ष, बसपा
एक्सपर्ट कमेंट
पहली बार रेल बजट को आम बजट में शामिल कर केंद्र की मोदी सरकार ने सराहनीय काम किया है। इससे बचे धन को देश के विकास में लगाया जाएगा। अलग-अलग बजट से फिजूलखर्ची होती थी, जो अब नहीं होगी। मेडिकल पीजी कक्षाओं की पांच हजार सीटें बढ़ाना, उच्चस्तरीय परीक्षाओं के लिए एजेंसी प्रथा खत्म कर अलग सेल गठित करने की घोषणा, कृषि क्षेत्र को प्रमोट करना आदि ऐसे प्रयास हैं, जो भारतीय इकोनॉमी को मजबूत बनाने में सहयोग करेंगे। कुल मिलाकर बजट संतोषजनक कहा जा सकता है। - डॉ. रुचि द्विवेदी, प्रवक्ता अर्थशास्त्र, आर्य महिला महाविद्यालय, शाहजहांपुर