शाहजहांपुर। शहर में पंचमुखी हनुमान मंदिर किनारे गर्रा नदी पुल के पास बने घाट से नदी का अविस्मरणीय नजारा दिखाई देता था। कुछ पल फुरसत के गुजारने के लिए यह बेहद ही मुफीद स्थान है। पड़ोस के मंदिर में स्थापित विराट बजरंगी की मूर्ति होने के बावजूद गर्रा घाट पर जाने से लोग कतराते हैं। दिन ढलने के बाद प्रकाश की व्यवस्था न होना, टूटी सीढ़ियां, गंदगी का अंबार, नदी का दूषित पानी इसकी बड़ी वजह है। इसके चलते लोग मंदिर में भगवान के दर्शन करने तो जाते हैं लेकिन दो मिनट गर्रा किनारे घूमना पसंद नहीं करते। गर्रा घाट को रमणीक स्थल बनाने के लिए प्रशासन, नगर निगम, समाजसेवी संगठन और गणमान्य नागरिकों को आगे आने की जरूरत है।
सदर क्षेत्र में शहीद उद्यान, चौक इलाके में हनुमत धाम में लोग परिवार के साथ घूमकर आनंद उठाते हैं। बरेली मोड़ की ओर बसे हजारों लोगों के लिए कोई ऐसा प्वाइंट नहीं है, जहां पर वे बैठकर कुछ वक्त सुकून से गुजार सकें। हालांकि, यहां पर गर्रा नदी बहती है। हनुमान जी के मंदिर और गांधी पार्क के पीछे गर्रा घाट पर लोगों के बैठने के लिए बेंच पड़ी हैं। सीढ़ियां भी बनी हुईं हैं। मगर प्रशासन की घोर उपेक्षा के कारण यह जगह बदहाली का शिकार है। एक-एक कदम आगे बढ़ाने पर डर लगता है। दुर्गंध के कारण लोगों का घाट के नीचे कदम बढ़ाने का मन नहीं करता है। जिन नदियों को स्वच्छ और निर्मल बनाने की बातें कहीं गईं थीं। उनमें गंदा पानी बह रहा है। नदी के अंदर भैंसें गंदगी फैला रही हैं। खुले में शौच मुक्त जिले का नारा भी गर्रा घाट पर पहुंचने के बाद बेमानी साबित होता है। संवाद
बेंचों के पास गंदगी, दुकानों का पानी नदी में जा रहा
गर्रा नदी के घाट पर हनुमान जी के मंदिर गेट के बायीं तरफ वर्षों पहले एक ऐसा स्थान चिह्नित किया था जहां से नदी का दूर तक नजारा देखते हुए कुछ समय को बिताया जा सके। उस जगह पर पांच बेंच भी डाली गई थी। कुछ दिन तो सब ठीक चलता रहा, लेकिन उसके बाद हालत खराब होती चली गई। नगर निगम की ओर से गर्रा नदी के पुराने पुल पर बने वेंडिंग जोन का पानी बेंचों के पीछे गिर रहा। इसके चलते लोग बेंचों पर बैठने से कतराते हैं। पांच बेंच के पूरे परिसर में गंदगी का साम्राज्य है। रात में उजाले का इंतजाम भी नहीं है। हालांकि, यहीं पर सफाई कराकर एक बेहतर स्थान को विकसित किया जा सकता है।
टूट गई सीढ़ियों की टाइल्स, बदहाल हुआ किनारा
नदी के किनारे सीढ़ियों को इस उद्देश्य के साथ बनाया गया था कि लोग यहां पर बैठकर समय व्यतीत करेंगे। इस समय सीढ़ियां बदहाली के दौर में हैं। कई जगहों पर टाइल्स टूट गईं हैं। प्लास्टर भी उखड़ गया है। कदम बढ़ाने में थोड़ी-सी लापरवाही चोट पहुंचा सकती है। जानवरों के विचरण करने के कारण लोग उस साइड में जाना पसंद नहीं करते हैं।
ठहरने वाले स्थान पर काला पड़ गया फर्श
नदी के घाट पर एक ऐसा स्थान है, जहां पर परिवार के साथ खड़े होकर कुछ समय व्यतीत कर सकते हैं। देखरेख के अभाव में यह स्थान भी काफी खराब हो गया। यहां पर असामाजिक तत्वों का जमावाड़ा रहता है। गंदगी के कारण यहां का फर्श तक काला पड़ गया है। जबकि सफाई होने से यह स्थान फिर से विकसित किया जा सकता है।