कोलाघाट में पाईल फाउंडेशन के लिए चिन्हित स्थान। संवाद
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शाहजहांपुर। मिर्जापुर क्षेत्र में रामगंगा और बहगुल नदी पर बने कोलाघाट पक्के पुल के ध्वस्त हिस्से को परंपरागत कुओं (वेल फाउंडेशन) का आधार देकर निर्मित करने के बजाय नई तकनीक पाइल फाउंडेशन देकर बनाया जाएगा। इसके लिए सेतु निर्माण निगम ने स्थान भी चिन्हित कर लिया है, लेकिन क्षतिग्रस्त हिस्से को बनाकर पक्के पुल पर यातायात शुरू होने में चार से पांच माह का समय लगने का अनुमान है।
गत वर्ष 29 नवंबर को कोलाघाट पुल का सात नंबर पिलर जमींदोज हो जाने से पुल टूटकर तीन हिस्सों में बट गया था। सेतु निर्माण निगम के अभियंताओं ने मौके पर भूगर्भ विशेषज्ञों की टीम बुलाकर पुल के बाकी पिलर के आसपास मिट्टी का परीक्षण कराया था ताकि यह पता लगाया जा सके कि भविष्य में उनके ढहने का कोई खतरा तो नहीं है। जांच में पुल के शेष पिलर सही पाए गए, लेकिन सेतु निगम के अभियंताओं ने पुल के 60 मीटर क्षतिग्रस्त हिस्से को वेल फाउंडेशन की जगह नई टेक्निक पाईल फाउंडेशन से जोड़कर आवागमन योग्य बनाने का निर्णय किया है।
सेतु निगम के तकनीकी पर्यवेक्षक नितिन कुमार वर्मा का कहना है कि पहले यह पुल वेल फाउंडेशन तकनीक से बनाया गया था। इस कारण पुल का एक वेल फाउंडेशन (पिलर) ही जमीन में समा गया था। अब पुल के क्षतिग्रस्त दो स्पेन (60 मीटर) के बीच के हिस्से को एक वेल फाउंडेशन की जगह तीन पाईल फाउंडेशन तैयार कर बनाया जाएगा। बाद में पक्के पुल के दोनों हिस्से उससे जोड़ दिए जाएंगे। उन्होंने बताया इस कार्य में चार से पांच माह का समय लग जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी मानसून सीजन में नदियां उफनाने पर मिर्जापुर, कलान क्षेत्र के लोगों को जिला मुख्यालय तक आवागमन में कठिनाई हो सकती है।