शाहजहांपुर। खेत में आग लगाने का आरोप लगने के बाद अपने ही घर में कैदियों की तरह रह रहे मानसिक मंदित किशोर को बेड़ियों से मुक्त कर दिया गया है। उसे अब राजस्थान के भरतपुर स्थित अपना घर आश्रम भेजा जाएगा। फिलहाल उसका इलाज जिला अस्पताल में कराया जाएगा।
किशोर को बेड़ियों से मुक्त कराने का सराहनीय कार्य करने वाली महिला शक्ति केंद्र की महिला कल्याण अधिकारी रेेखा शर्मा ने बताया कि उसे पिछले छह महीने से बांधकर रखा गया था। उस पर आरोप था कि उसने गांव के एक खेत में आग लगाई थी। इसके बाद लगातार गांव के लोग किसी न किसी घटना का दोषी ठहराने लगे। जिससे क्षुब्ध होकर परिजन ने उसको जंजीरों से बांध दिया, ताकि वह घर से बाहर न जा सके। अमर उजाला में प्रकाशित होने पर उसके गांव पहुंचकर उन्होंने किशोर के परिवार वालों से बातचीत की। रेखा शर्मा ने उसे भी प्यार से खिलाया-पिलाया। इसके बाद जंजीरों का ताला खोल दिया। परिजन को बताया कि उनका बेटा पूरी तरह से सही हो सकता है। जिला अस्पताल में इस तरह के बालकों के लिए इलाज संभव है। बालक के साथ इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं है। गांव वालों को भी बालक के साथ अच्छा व्यवहार करने की अपील की गई है। उन्होंने बताया कि बालक की सही उम्र न पता चल पाने के कारण फिलहाल उसे भरतपुर स्थित अपना आश्रम नहीं भेजा जा सकता है, लेकिन उसका इलाज जिला अस्पताल के मनोवैज्ञानिक समाजसेवी नंदिनी सक्सेना की देखरेख में होगा।