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अरबों रुपया दबाए हैं चीनी मिलें

Mon, 15 Jun 2015 11:02 PM IST
शाहजहांपुर।
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 प्रदेश शासन के तमाम दिशा निर्देशों को ठेंगा दिखा रहे चीनी मिल संचालकों पर हाईकोर्ट के 15 जून तक 25 फीसदी बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान करने के आदेश का भी कोई फर्क नहीं पड़ा। जिले में मकसूदापुर चीनी मिल को छोड़कर किसी भी चीनी मिल ने बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया। अब भी चीनी मिलें गन्ना किसानों का अरबों रुपया दबाए बैठी हैं।
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करीब दो सप्ताह पहले हाईकोर्ट ने प्रदेश की सभी चीनी मिलों को बकाया धनराशि का 25 फीसदी भुगतान 15 जून तक करने के निर्देश दिए थे। तब बिरला ग्रुप की रोजा चीनी मिल पर 3217.56 लाख, डालमियां ग्रुप की निगोही चीनी मिल पर 3340.44 लाख, बजाज ग्रुप की मकसूदापुर बंडा चीनी मिल पर 4621.11 लाख, सहकारी चीनी मिल पुवायां पर 1646.71 लाख और तिलहर चीनी मिल पर 2411.65 लाख रुपये गन्ना किसानों के बकाया थे।
इसमें मकसूदापुर बंडा चीनी मिल ने गन्ना मूल्यों का बकाया भुगतान करने के साथ ही इच्छुक किसानों को धनराशि के बदले चीनी का वितरण भी किया था। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार अब तक केवल मकसूदापुर ने ही 25 फीसदी से ऊपर भुगतान किया है। वहीं पेराई के दिनों में सबसे अच्छा भुगतान करने वाली निगोही चीनी मिल ने भी कोर्ट के आदेश के अनुसार भुगतान करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। रोजा चीनी मिल का भी 25 फीसदी नहीं हो सका। सहकारी चीनी मिलों में भुगतान की प्रक्रिया चालू है, लेकिन सहकारी मिलें भी गन्ना किसानों को भुगतान के मामले में रुला रही हैं।
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Òहाईकोर्ट के निर्देश मिलते ही मिलों को 25 फीसदी भुगतान करने के सख्त निर्देश दिए थे। किसी तरह से मकसूदापुर चीनी का 25 फीसदी बकाया भुगतान ही हो सका। निजी मिलों पर भुगतान का दबाव लगातार बनाया जा रहा है। साथ ही सहकारी मिलों से भुगतान की प्रक्रिया लगातार जारी है।Ó
- बीके पटेल, जिला गन्ना अधिकारी


Òजिला गन्ना अधिकारी और चीनी मिलों को भुगतान में तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए जा चुके हैं। भुगतान न करने वाली मिलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।Ó
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- पीके श्रीवास्तव, एडीएम, वित्त एवं राजस्व
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