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भरत ने राज नहीं, राम का नाम चाहा : विजय कौशल

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ओसीएफ रामलीला मैदान पर श्रीराम कथा सुनाते विजय कौशल महाराज। स्रोत: आयोजक
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शाहजहांपुर। मंगलमय परिवार के तत्वावधान में कैंट स्थित रामलीला मैदान पर चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन विजय कौशल महाराज ने भरत चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भरत ने राज नहीं, राम का नाम चाहा। उनके लिए शासन नहीं, सेवा ही सर्वोच्च थी। इस दौरान तमाम श्रद्धालु प्रसंग सुन भावविभोर हो उठे।
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विजय कौशल महाराज ने कहा कि रामायण में यदि किसी चरित्र का हृदय सबसे अधिक निर्मल है, तो वह भरत हैं। भरत केवल भाई नहीं, वे भक्ति का पर्वत हैं, जिसके सामने पहाड़ भी छोटे पड़ जाते हैं। राम वन को चले गए, पर भरत की आत्मा अयोध्या में नहीं रही, वह भी वन में ही भटकती रही।
भरत के हृदय की वेदना इतनी गहरी थी कि वे वन में श्रीराम को वापस लाने के लिए गए, पर राम ने वचन निभाने के लिए वनवास स्वीकार कर लिया। दोनों भाइयों की यह भक्ति और त्याग की वार्ता आज भी संसार का पथ प्रकाशित करती है। मुख्य यजमान एमएलसी सुधीर गुप्ता अपनी धर्मपत्नी के साथ मौजूद रहे। मुख्य अतिथि वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना रहे। स्वामी हरिदास, राजेश अवस्थी, गोविंद मिश्रा, डीपीएस राठौर, सोनिया राठौर, अशित पाठक आदि मौजूद रहे।

ओसीएफ रामलीला मैदान पर श्रीराम कथा सुनाते विजय कौशल महाराज। स्रोत: आयोजक

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