मुमुक्षु आश्रम में कथा सुनाते कथाव्यास विजय कौशल जी महाराज। स्रोत: आयोजक
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शाहजहांपुर। मुमुक्षु आश्रम में आयोजित श्रीराम कथा के अंतिम दिन कथा व्यास संत विजय कौशल महाराज ने भगवान श्रीराम और माता जानकी के विवाह का मनोहारी वर्णन किया। इससे पूर्व मुख्य यजमान एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त ने व्यास पीठ सहित मंचासीन संत-महात्माओं का पूजन एवं वंदन किया।
कथा व्यास ने विश्वामित्र जी के साथ प्रभु श्रीराम के जनकपुरी जाने और शापित अहिल्या के उद्धार आदि प्रसंगों को कथा में शामिल किया। बताया कि जनकपुरी जाते समय मार्ग पर भगवान श्रीराम के चरणों के स्पर्श से देवी अहिल्या की नारी के तौर पर मूल रूप में फिर से वापसी हो गई।
जनकपुरी पहुंचने पर राजा जनक सहित वहां की नर-नारियां प्रभु श्रीराम के अप्रतिम लावण्य को देखकर मुग्ध हो गए। पुष्प वाटिका में माता जानकी एवं प्रभु श्रीराम के मिलन का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने बताया कि माता जानकी ने जैसे ही प्रभु के दर्शन किए तो वह मंत्रमुग्ध होकर उन्हें अपलक निहारती रह गईं।
अंत में प्रभु की आरती से कथा का विश्राम हुआ। पूजन व आरती में राज्यसभा सदस्य मिथिलेश कुमार, ब्रह्मचारी वेदांत प्रकाश, डॉ. शिवम मिश्रा, प्रतिभा पाठक, जगदीश प्रसाद अग्रवाल, कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव डॉ. अवनीश मिश्र, प्रभा मिश्रा आदि उपस्थित रहे। प्रसाद वितरण में प्रो. प्रभात शुक्ला, कमलेश त्रिवेदी एवं मधुलिका त्रिवेदी आदि का योगदान रहा। व्यवस्था में डाॅ. अनुराग अग्रवाल, सुयश सिन्हा, डाॅ. शिशिर शुक्ला, डाॅ. कविता भटनागर, डाॅ. रुपक श्रीवास्तव आदि ने सहयोग किया।
मुमुक्षु आश्रम में कथा सुनाते कथाव्यास विजय कौशल जी महाराज। स्रोत: आयोजक- फोटो : संवाद