शाहजहांपुर। आप कब्ज, बदहजमी, एसिडिटी, एलर्जी, अस्थमा आदि से पहले से परेशान हैं तो त्योहर पर खान-पान में विशेष सावधानी बरतनी होगी। साथ ही रंगों से थोड़ी दूरी बनाए रखना भी समझदारी होगी। डॉक्टरों की सलाह है कि पेट के रोगों से परेशान लोग तले हुए पकवान सोच-समझकर सीमित मात्रा मेें खाएं। इसी तरह श्वांस रोगों के मरीज पानी में घुलने वाले सिंथेटिक रंगों समेत हवा में उड़ने वाले अबीर-गुलाल जैसे सूखे रंगों से दूरी बनाए रखें तो उनकी सेहत के लिए बेहतर होगा।
होली पर शराब और मांसाहार से बनाएं दूरी
आयुर्वेदाचार्य डॉ. अवधेश मणि त्रिपाठी के अनुसार ऋतु परिवर्तन के दौर में हम सभी जाड़े से गर्मी की ओर जा रहे हैं और ऐसे मौसम में सोंठ और गुड़ के भरावन से तैयार गुझिया सीने पर जमा कफ बाहर निकालने में मददगार होगी। होली पर लोग शराब से बचे रहें तो ज्यादा अच्छा होगा, क्योंकि नशे में भूख लगने पर ज्यादा खा लेने की दशा में हाजमा बिगड़ जाएगा। बदलते मौसम में नॉनवेज खाने से भी बचें और यदि मांसाहार अधिक कर लिया है तो नींबू और छाछ का सेवन राहत देगा।
सूखे रंगों की उड़ती धुंध से दूर रहें श्वांस के रोगी
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. राजीव सिंह का कहना है कि पानी में घुलने वाले सिंथेटिक रंग त्वचा और आंखों के संपर्क में आने पर बर्निंग स्पॉट (जलने जैसे निशान) और कंजक्टिवाइटिस आदि कई बीमारियां दे सकते हैं। अबीर-गुलाल जैसे सूखे रंग भी रासायनिक विधि से बनाए जाने के कारण उनमें मिले केमिकल स्वास्थ्य को नुकसानदेह साबित होंगे। जैविक विधि से तैयार होने वाले जिन रंगों का प्रचार हर्बल कलर के तौर पर किया जा रहा है, उनमें शामिल फूलों का अंश एलर्जी के मरीजों को दिक्कत पैदा करेगा।
डॉ.अवधेश मणि त्रिपाठी।- फोटो : SHAHJAHANPUR