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शिवालयः शिवभक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है बाबा विश्वनाथ मंदिर

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शाहजहांपुर के टाउन रोड स्थित श्रीबाबा विश्व नाथ मंदिर । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। टाउनहाल में बाबा विश्वनाथ का मंदिर शिवभक्तों की आस्था का मुख्य केंद्र है। मंदिर की स्थापना के बाद से यहां रोजाना सैकड़ों लोग दर्शन के लिए आते हैं। महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की खासी भीड़ रहती है। मंदिर के विषय में इतिहासकार डॉ. एनसी मेहरोत्रा की पुस्तक शाहजहांपुर: ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर शीर्षक से छपी पुस्तक में पूरी जानकारी मिलती है।
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इतिहासकार डॉ. एनसी मेहरोत्रा ने बताया कि साल 1953 में विशन चंद्र सेठ नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष बने थे। तब नगर पालिका कार्यालय के पास ही अमरूद का बाग था। इसी बाग में उन्होंने मंदिर बनवाने का संकल्प लिया। मंदिर बनाने का शुरुआत में काफी विरोध हुआ था। बताया जाता है कि तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट के निरीक्षण से पहले ही बाग में एक पेड़ के नीचे कुछ पत्थर रखकर उसकी पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई। बाद में सरदार दर्शन सिंह के घर से शिवलिंग के आकार का एक भारी पत्थर लाकर उसकी स्थापना कर दी गई और उसी की पूजा शुरू हो गई।
वहीं एक ओर मंदिर निर्माण को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही थी, तो दूसरी ओर जनसमुदाय ने नगर पालिका अध्यक्ष को प्रार्थना पत्र देकर मंदिर निर्माण की मांग करनी शुरू कर दी। इसी बीच चार मई 1956 को बाबा विश्वनाथ मंदिर प्रबंध समिति का पंजीकरण भी करा दिया गया। इसी क्रम में 21 जनवरी 1957 को प्रदेश के तत्कालीन मंत्री सैयद अली जहीर शाहजहांपुर आए तो समिति ने उन्हें ज्ञापन देकर मंदिर निर्माण की बात कही।
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इसके बाद मंत्री विचित्र नारायण शर्मा के प्रयासों से मंदिर जीर्णोद्धार पर लगाया प्रतिबंध हटाने के आदेश हो गए। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद को ज्ञापन दिया गया था। साथ ही मंदिर निर्माण शुरू करा दिया गया। मंदिर के ही पास 25 फरवरी 1966 को बाबा विश्वनाथ यात्री निवास की आधारशिला रखी गई।
महाशिवरात्रि व श्रावण मास में जलाभिषेक को उमड़ते हैं भक्त
बाबा विश्वनाथ मंदिर हिंदू समुदाय के लिए विशेष आराधना का केंद्र बन चुका है। मंदिर की प्राचीर के नीचे भगवान शिव, माता पार्वती, गणेशजी, शिवलिंग, नंदी की प्रतिमा स्थापित है। यह शहर का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां शिवलिंग चांदी से आच्छादित है। सर्प भी पूरी तरह चांदी का बना हुआ है।
इनके अलावा मां दुर्गा, राधा-कृष्ण, श्रीराम दरबार, रामभक्त हनुमान, शनिदेव आदि की भव्य और दिव्य प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा हो चुकी है। नवरात्र में जहां इस मंदिर में मां भगवती की आराधना को भक्त उमड़ते हैं, वहीं श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ के भक्त जलाभिषेक के लिए आते हैं। जो भी भक्त यहां सच्चे मन से प्रार्थना करता उसकी हर मुराद पूरी होती है।
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