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नोटबन्दी और भारी आवक से मुरझाया सब्जी कारोबार

Wed, 07 Dec 2016 11:54 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
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सब्जी मंडी का हाल
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शाहजहांपुर/रोजा। सर्दी के सीजन में सब्जियों की पैदावार बढ़ने से मंडियों में उनके दाम बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन इस बार नोटबंदी की मार से बेहाल किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। मौसम के अनुरूप सब्जियों की आवक बढ़ने के साथ खरीददार नहीं मिल रहे और इसीलिए रोजा मंडी से लेकर शहर की बहादुरगंज छोटी सब्जी मंडी तक ढेरियों की नीलामी बोलियां परवान नहीं चढ़ रहीं। इसीलिए खुदरा सब्जी विक्रेता सस्ते रेट पर बिक्री करने के बावजूद मुनाफा कमा रहे हैं।    
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सब्जी की रोजमर्रा की जरूरत में इस्तेमाल होने वाला आलू रोजा मंडी में बुधवार को छह रुपये किलो थोक भाव बिका। सोया साग मात्र एक रुपये किलो बिका। इसी तरह तमाम सीजनल सब्जियां जैसे गोभी, शिमला मिर्च, फ्रेंचबीन, मूली, मेथी साग, टमाटर, गाजर, के भाव भी गिरे। इससे किसानों का मुनाफा मंडी पर छाई मंदी की भेंट चढ़ गया। नासिक मंडी से आया प्याज आठ रुपये थोक रेट पर बिका जबकि उसकी 15 रुपये किलो खुदरा बिक्री हो रही है। 
सब्जियों के भाव कम होने के पीछे नोटबंदी मुख्य कारण माना जा रहा है। नोटबंदी से छोटे नोटों की कमी होने के साथ खुदरा से लेकर थोक व्यापार तक भुगतान की पूरी प्रक्रिया लड़खड़ा गई है। घरों में दो हजार का नोट है, लेकिन शाम की सब्जी के लिए खुले पैसे नहीं हैं। बेचने वाले किसान को भुगतान को लेकर परेशान हैं। ऐसे में बिचौलिए खेत से कम कीमत पर फसल का सौदा कर उसे सीधे ठेलेवालों को बड़े मुनाफे पर बिक्री कर रहे हैं। 
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किसान की बात
सोया के साग में नहीं निकली लागत
हम रोजा मण्डी में सोया का साग लाए हैं। यहां सिर्फ पांच रुपये प्रति पांच किलो के भाव हमारा सोया बिक रहा है जिससे हमारी लागत नही निकलती है। फसल खराब होने से अच्छा है कि जो मिले वही ठीक। नोटबंदी से हमारा पैसा अटक गया है। -अब्दुल वासिद, किसान, मिश्रीपुर
सब्जी आढ़ती की बात
ज्यादा पैदावार से हो रहा नुकसान 
इस बार सब्जियों की पैदावार ज्यादा हुई हैश् जिससे उनके दामों में एकाएक कमी आ गई। मंडी में फूल गोभी तीन रुपये किलो थोक भाव बिक रही है, जबकि पिछले साल इन्हीं दिनों की तुलना में यह रेट बहुत कम है। खुदरा व्यापारी मंडी टैक्स और भाड़ा जोड़कर मुनाफा कमा रहे है।-मो0 इस्माइल, थोक सब्जी विक्रेता,रोजा मंडी
पैसों की किल्लत में डूब रहा मुनाफा
पैसो की किल्लत के चलते सब्जी कारोबार अब मुनाफे का सौदा नही रहा है। सब्जियों की भारी आवक होने से दामो में कमी आई है। आगे सीजनल सब्जियों के दामों में कमी होने की उम्मीद है।-भूरे, सब्जी विक्रेता, आदर्श नगर रोजा
रोजा मंडी में बुधवार के भाव (रुपये प्रति किलो में) और 10 दिन पहले के भाव
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सब्जी        थोक    खुदरा    10 दिन पहले का रेट
आलू        06    08    10
प्याज        08    10    20
टमा टर        08    15    30
मटर        25    40    80
गोभी        03    10    20
फ्रेंचबीन        20    40    60
गाजर        12    20    30
हरा मिर्चा        12    20    30
मू ली        04    10    20
लहसुन        100    200    300
शिमला मिर्च    20    30    60
मार्केट में मंदी से आलू की फसल खोदने से हिचक रहे किसान
कोल्ड स्टोरेज वाले भी पुराना स्टॉक निकालने की हड़बड़ी में नहीं 
नोटबंदी के बाद खेती-किसानी के लिए खाद, बीज की खरीददारी के लिये नगदी की समस्या के साथ ही पैदा हुई फसल के रेट भी मुनासिब न मिल पाने से काश्तकार परेशान हैं। आलू की फसल सस्ते दामों में बेचना काश्तकार की मजबूरी बन गई है। किसानों का कहना है कि आलू की फसल मंडी में बिक्री के लिये ले जाये पर नगदी का संकट होने के कारण व्यापारियो को कम रेट बेचना उनकी मजबूरी  है।  अभी इस क्षेत्र मे अधिकांश काश्तकारो ने आलू की फसल की खुदाई नहीं की है।
कोल्ड स्टोरज मे रखी गई आलू की फसल ज्यादातर अक्तूबर महीने के अंत या फि र नवंबर के पहले सप्ताह में नोटबंदी से पहले ही निकाल ली गई थी। लेकिन जिन काश्तकारों ने नहीं निकाली वह अब नोटबंदी के कारण आई मंदी में उसे अभी रोके हुये हैं। आलू की पकी फसल के इंतजार मे किसानों ने अभी खुदाई शुरू नहीं की है। लिहाजा कोल्ड स्टोरज वाले भी पुरानी रखी आलू की फ सल को निकालने की अभी जल्दी में नही है। गांव ठिगरी निवासी आलू के काश्तकार पातीराम के अनुसार, उन्होंने मंडी में अपनी आलू की फ सल तीन सौ रुपये कट्टा उधार में बेची। बताया कि लागत भी नहीं निकल पाई। याकूबपुर निवासी रामनाथ का कहना है कि उनका आलू पौने तीन सौ रुपये प्रति कट्टा बिका यानी मौजूदा समय आलू का रेट दो -पांच सौ से छह सौ रुपये प्रति कुन्टल है जिससे किसान अपनी लागत नहीं निकाल  पा रहा है। आलू आढ़ती विश्वास गुप्ता ने बताया कि बीते साल इन दिनों आलू की फसल सात सौ से आठ सौ रुपये कुंतल थी। बताया कि बाहर से व्यापारी न के बराबर आ रहा है।
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