सिकंदरपुर अफगानान गांव के एक मजदूर के बेटे ने दिल्ली में हुई नेशनल चैंपियनशिप बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पिछले डेढ़ दशक से परिवार समेत मुरादाबाद में रह रहे अमित यादव अपने पैतृक गांव आए तो ग्रामीणों ने उन्हें सिर आंखों पर बैठा लिया। वह 24 और 25 जुलाई को भूटान में होने वाली अंतर्राष्ट्रीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में भाग लेने की तैयारी में जुटे हैं।
सिकंदरपुर अफगानान के रामसेवक यादव 15 साल पहले परिवार के भरण पोषण के लिए मेहनत-मजदूरी करने मुरादाबाद चले गए। वहां उनके बड़े बेटे अमित ने पढ़ाई के साथ बॉक्सिंग के अपने शौक को पूरा करने के लिए जुनून की हद तक मेहनत की। मुरादाबाद में बीकॉम की पढ़ाई कर रहे अमित ने कुछ ही दिनों में जिला और मंडल स्तर की कई प्रतियोगिताएं जीतकर बॉक्सिंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली। उनके इस जुनून को अंजाम तक पहुंचाने में मुरादाबाद के ही उनके दोस्त पंकज सिंह ने काफी मदद की। पंकज खुद भी टॉप के बॉक्सर हैं। अमित के अनुसार जब वह कक्षा चार में पढ़ते थे, तभी से मुरादाबाद के सुभाषचंद्र बोस स्टेडियम में बॉक्सिंग की प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। वर्ष 2014 में कुशीनगर में हुई प्रांतीय स्तर की प्रतियोगिता में अपने कॉलेज का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक जीता।
बकौल अमित, इसके बाद कई अन्य प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया। मगर 31 मई 2015 उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट बन गई। इस दिन दिल्ली के राजीव गांधी स्टेडियम में हुई राष्ट्रीय स्तर की 50-55 किलोग्राम भार वर्ग की बॉक्सिंग प्रतियोगिता में अमित ने स्वर्ण पदक जीता। इसी दिन 45-50 किलोग्राम भार वर्ग की प्रतियोगिता में उनके दोस्त पंकज सिंह ने भी स्वर्ण पदक हासिल किया था। यह प्रतियोगिता दिल्ली के एक क्लब ने कराई थी। अमित को मलाल है कि उन्हें अभी तक सरकार की ओर से कोई सहायता नहीं मिली है। बताया कि वह दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए 21 जुलाई को भूटान जा रहे हैं। अमित देश के लिए खेलने के अपने सपने को साकार करने की कोशिशों में जुटे हैं। उनके घर में माता गुड्डी देवी के अलावा एक बहन और छोटा भाई है।