लंबे घमासान के बाद विजेता बनकर उभरे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की फाइनल लिस्ट में जगह पाने को पूर्व पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने परिक्रमा शुरू कर दी है। जिलाध्यक्ष बदलने पर नई कार्यकारिणी का चेहरा पूरी तरह बदलना तय माना जा रहा है।
यहां के वरिष्ठ सपा नेताओं की अभी तक मुखिया मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक समान रूप से पहुंच रही है। यही वजह रही कि मुखिया के घर की कलह को लेकर यहां के सपा नेता शुरुआत में तटस्थ रहे, लेकिन पलड़ा अखिलेश का भारी देख लोगों ने रुख बदलना शुरू कर दिया। अब, जब शीर्ष में दो खेमे स्पष्ट हो गए तो ऐसे प्रत्याशी जो निवर्तमान नेतृत्व के ज्यादा नजदीकी रहे, उनके टिकट छीने जाने की आशंका जताई जा रही है। बता दें कि जिले की छह में से तीन सीट सपा के पास हैं। ददरौल विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान विधायक से राज्यमंत्री बने राममूर्ति सिंह वर्मा, पुवायां से शकुंतला देवी और कटरा से विधायक राजेश यादव को कई माह पूर्व दोबारा प्रत्याशी घोषित किया जा चुका है। इसी तरह बाकी तीनों सीटें जीतने के लिए पिछला चुनाव हार चुके शरदवीर सिंह को जलालाबाद, शहर से तनवीर खां और तिलहर से अनवर अली से दोबारा प्रत्याशी बनाने की घोषणा, लेकिन नेतृत्व स्तर पर मचे घमासान के बीच तिलहर से अनवर अली का टिकट काटकर अब्दुल कादिर को दे दिया गया। अब्दुल कादिर शुरू से कहते आए हैं कि उन्हें परिवार में सभी सहमति से टिकट मिला, लेकिन मुख्यमंत्री की सूची में उनका नाम न होना सपाइयों को अचरज में डाल रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार अनवर अली गत माह के आखिरी सप्ताह में लखनऊ जाकर अपने टिकट के लिए विधानसभा एनेक्सी में मुख्यमंत्री से भेंट कर चुके हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रत्याशी को पदाधिकारी बनाए रखने पर आपत्ति पार्टी फोरम में पहले भी उठ चुकी है। इसलिए दोबारा यही मुद्दा उठने पर तनवीर खां की जगह किसी अन्य को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर कार्यकारिणी के अन्य पदों के लिए दावेदार संभालने कठिन होंगे।
बदलाव करने पर अंतिम निर्णय करेगा नेतृत्व
बदलाव के बारे में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और प्रांतीय नेतृत्व को निर्णय करना है। ऊपर से जो कहा जाएगा, उस पर अमल करते रहेंगे। -तनवीर खां, निवर्तमान जिलाध्यक्ष, सपा