नेपाल में गत सप्ताह आए भूकंप पीड़ितों के लिए जिला प्रशासन द्वारा भेजी गई राहत सामग्री अभी जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाई है। यहां से भेजे गए राहत सामग्री के तीन ट्रक गोरखपुर में नेपाल बार्डर पर फंस गए हैं। इस वजह से विभिन्न संगठनों द्वारा बाद में उपलब्ध कराई गई खाद्य सामग्री के बोरे चार दिन से कलक्ट्रेट के बरामदे में डंप हैं।
नेपाल के भूकंप पीड़ितों के लिए राहत सामग्री जुटाने को डीएम शुभ्रा सक्सेना के निर्देश पर कलक्ट्रेट कैंपस में 30 अप्रैल और एक मई को विशेष कैंप लगाया गया था। इस दौरान विभिन्न संगठनों और संस्थाओं ने राहत कैंप को तिरपाल, रजाई-गद्दे, वस्त्र, भुना चना, चावल, आटा, मोमबत्ती-माचिस आदि वस्तुएं उपलब्ध कराईं। यह सारी सामग्री तीन ट्रकों में लोड कराकर नेपाल बार्डर तक पहुंचाने के लिए गोरखपुर भेजी गई थी।
इधर, राहत सामग्री मिलने का दौर जारी देख कैंप एक दिन बढ़ा दिया गया। तीनों ट्रकों की रवानगी के बाद कई कंपनियों और संस्थाओं ने लइया, भुना चना, चावल, बिस्किट, पौष्टिक आहार वाली गोलियां आदि सामग्री के बोरे कैंप में जमा कराए, लेकिन यह सारा सामान अभी जस का तस कलक्ट्रेट में पड़ा है। चूहे बोरों को कुतरकर राहत सामग्री को अपना निवाला बना रहे हैं।
कलक्ट्रेट में आपदा राहत पटल का कामकाज देख रहे प्रदीप गुप्ता ने बताया कि नेपाल सरकार गोरखपुर के अधिकारियों से राहत सामग्री वाले ट्रक काठमांडू तक भेजने का आग्रह कर रही है। चूंकि, काठमांडू के पहाड़ी रास्तों पर मिनी ट्रकों से माल की ढुलाई संभव है। इसलिए गोरखपुर में यहां से भेजे गए ट्रकों की अनलोडिंग में समय लग रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रकों की वापसी होने पर शेष राहत सामग्री भी गोरखपुर को लोड करा दी जाएगी।