दबंगों द्वारा 20 बीघा गेहूं फसल काट लेने के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर गढ़िया रंगीन क्षेत्र के गांव जगतियापुर से आए ग्रामीणों का शिष्टमंडल मंगलवार को शोषित समाज मोर्चा के प्रदेश महासचिव के नेतृत्व में सिटी मजिस्ट्रेट से मिला। सिटी मजिस्ट्रेट की सलाह पर कुनबे के मुखिया रामसरन ने तिलहर जाकर एसडीएम से अपनी बात कही, लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों ने कलक्ट्रेट में धरना दूसरे दिन भी जारी रखा।
रामसरन और उनके परिवार के सदस्यों ने इस मामले में गढ़िया रंगीन थाना पुलिस और अधिकारियों के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं होने के विरोध में सोमवार से कलक्ट्रेट में डेरा डाल रखा है। धरना दे रहे ग्रामीणों को अधिकारियों ने कलक्ट्रेट कैंपस से हटाने की कोशिश की, लेकिन पीड़ितों के तीखे तेवर देख अफसर पीछे हट गए। मंगलवार को दोपहर शोषित मोर्चा के प्रदेश महासचिव फकीरे लाल भोजवाल रामसरन और उनके भाइयों को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट कमलेश द्विवेदी से मिले।
सिटी मजिस्ट्रेट ने उन्हें समस्या के निस्तारण और कार्रवाई के लिए तिलहर की एसडीएम वंदना त्रिवेदी से मिलने का सुझाव दिया। इस पर परिवार के मुखिया रामसरन एसडीएम से मिलने तिलहर चले गए। इधर पीड़ित परिवार की अन्य महिलाओं और पुरुषों ने धरना जारी रखा। उनका कहना है कि दोषियों को सजा के साथ काटी गई फसल का दूसरे पक्ष से मुआवजा मिलने तक वह घर लौटकर नहीं जाएंगे।
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...जब सत्याग्रही आशा से भिड़ गई महिला
अपहृत बेटी की बरामदगी की मांग को लेकर दो साल से अधिक समय से कलक्ट्रेट में सत्याग्रह पर डटी बिजलीपुरा निवासी अशोक भोजवाल की पत्नी आशा से मंगलवार दोपहर उनके मोहल्ले की ही एक महिला भिड़ गई। हुआ यह कि आशा कलक्ट्रेट के धरना स्थल पर रोजाना की तरह बैठी थी। इसी दौरान कलक्ट्रेट में किसी काम से आई बिजलीपुरा की महिला ने आशा को देख कोई तीखी बात कह दी। सत्याग्रही आशा ने महिला से ऐतराज किया तो महिला भी आगबबूला हो उठी। उसने तैश में आकर चप्पल निकाली तो सत्याग्रही आशा भी चुनौती वाले अंदाज में महिला की ओर लपक पड़ी। बाद में अन्य लोगों ने आशा को समझाकर दोनों महिलाओं के बीच छिड़ा विवाद किसी तरह शांत कराया।