शाहजहांपुर। एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार ने कुम्हार के घर पहुंचकर मिट्टी के दीयों का निर्माण देखा। उन्होंने खुद भी चाक चलाकर स्वदेशी अपनाने का संदेश दिया। साथ ही कुम्हारों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए लाभ उठाने का आह्वान किया।
एडीएम अरविंद कुमार शुक्रवार को कुम्हार आशाराम के घर पहुंचे। पारंपरिक मिट्टी के दीयों के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। साथ ही स्वयं चाक घुमाकर दीये भी बनाए। इस दौरान उन्होंने कारीगरों से कहा कि शासन की नई व्यवस्था में कुम्हारों को मिट्टी के घड़े, दीये, खिलौने आदि बनाने के लिए आवश्यक साधारण मिट्टी या बालू की निकासी पर पूर्व पर्यावरणीय अनापत्ति की जरूरत नहीं होगी।
उन्होंने दीपावली पर जनसामान्य से अपील की है कि वे स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करें। मिट्टी के दीये जलाएं और स्थानीय कारीगरों का सहयोग करें। इस अवसर पर उपस्थित कुम्हार परिवार ने इलेक्ट्रिक चाक उपलब्ध कराने की मांग की। एडीएम अरविंद कुमार ने जल्द ही सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर ललित हरि मिश्रा, धर्मेंद्र दिवाकर, धीरज दीक्षित, संजीव, रोहित प्रजापति, मिथिलेश कुमारी, सुरजीत, अग्निवेश, सुमित आदि उपस्थित रहे।
दिवाली आते ही दीपक और मिट्टी के खिलौने बनाने में जुटे कुम्हार
खुदागंज। दिवाली नजदीक आने के साथ ही कुम्हार मिट्टी के दीपक और खिलौने बनाने में जुट गए हैं। उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद है।
कुम्हारों ने दीयों के अलावा बच्चों को लुभाने के लिए मिट्टी के भोंपू, तराजू, प्याली, छोटी मटकी, गगरी आदि बनाकर रखने शुरू कर दी हैं। मोहल्ला हनुमान गली निवासी पंचम लाल प्रजापति का कहना है कि आधुनिकता के दौर में मिट्टी के दीयों और बर्तनों की मांग कम तो हुई है, लेकिन समाज ने उन्हें पूरी तरह खारिज नहीं किया है।
हालांकि, उन्होंने मायूस लहजे में बताया कि कुम्हारी कला अब धीरे-धीरे कम हो रही है। अधिकतर तालाब पट जाने से मिट्टी मिलना कठिन हो गया है। समय के साथ मिट्टी महंगी हो जाने से उससे बने बर्तन भी महंगे हो रहे हैं। लोग उनकी वाजिब कीमत देने को तैयार नहीं होते। इस वजह से तमाम कुम्हारों ने पुश्तैनी पेशा छोड़ कर आजीविका के लिए अन्य विकल्प तलाश लिए हैं। संवाद
दिवाली के लिए दीये बनाते कुम्हार। संवाद