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खनन माफियाओं ने बदला ट्रेंड, मोपेड से ढोई जा रही रेत

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शाहजहांपुर। चौक कोतवाली क्षेत्र में इन दिनों खनन जोरों पर है। पकड़ा-धकड़ी के बीच खनन माफियाओं ने अब ट्रेंड बदल दिया है। वे, अब ट्रैक्टर ट्रॉली के बजाय मोपेड से खनन करा रहे हैं। एक बार में मोपेड पर पांच बोरियां लाद ली जाती हैं। खुलेआम हो रहे अवैध खनन के चलते बाढ़ के खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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चौक कोतवाली की अजीजगंज व राजघाट चौकी क्षेत्र में पडने वाली गर्रा नदी से अवैध रेत खनन का काम जोरों पर है। खनन माफियाओं ने ट्रैक्टर ट्रॉली के शोर से बचने के लिए मोपेड का सहारा लिया है। खनन का काम सुबह चार बजे से शुरू हो जाता है। गर्रा नदी किनारे मौजमपुर, उमरगंज, अब्दुल्लागंज से मोपेड पर पांच-पांच बोरियां लाद दी जाती हैं और यह लोग बड़े की आराम से निकल जाते हैं। शुरूआत में दो लोगों ने ध्यान नहीं दिया, जब मोपेडों के कई दिन के लगातार चक्कर लगते लोगों ने देखा तो उन्हें शक हो गया। जानकारी करने पर पता चला कि बोरियों में भरकर मोपेड से रेता ढोई जा रही है। इस संबंध में लोगों ने खनन अधिकारी से शिकायतें भी कीं लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि पुलिस की मिलीभगत से खनन का काम हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक प्रतिदिन करीब 70 से 80 मोपेड चालक पांच-पांच बोरियां एक बार में लाद लाते हैं। एक मोपेड के करीब छह से सात चक्कर लगते हैं। बालू की बोरियां पूर्व निर्धारित स्थान पर उतार कर प्रति बोरी 100 रुपये लेते हैं। सूत्रों से यह भी पता चला है कि कोतवाली चौक इलाके की दोनों ही पुलिस चौकियों पर एक मोपेड के एक चक्कर के 200 रुपये निर्धारित हैं। इसीलिए खुलेआम अवैध रेत खनन का कार्य कराया जा रहा है। हालांकि चौकी पुलिस इस तरह के आरोप से इंकार कर रही है। जिला खनन अधिकारी अभय रंजन ने बताया कि बताया कि मोपेड के जरिए खनन का अनोखा मामला संज्ञान में आया है। अवैध खनन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बालू के अवैध खनन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मोपेड से बालू की बोरियां लेकर बेचने के मामले में वह जांच कराएंगे। यदि कोई इसमें लिप्त पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
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इंद्र विक्रम सिंह, जिलाधिकारी
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