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इस बार कम रकबे में सिमट सकता है गन्ना

Wed, 23 Jul 2014 05:30 AM IST
Shahjahanpur
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वर्ष भर खेत फंसाने और लागत के बाद भी भुगतान नहीं मिलने से किसान खफा
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- अगर हालात यही रहे तो अगले वर्ष नाम मात्र का रह जाएगा रकबा
- किसानों ने मिलों से भुगतान की प्रक्रिया को बताया ऊंट के मुंह में जीरा
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां। चीनी मिलों की मनमानी और सरकार के ढुलमुल रवैए से खफा किसानों का कहना है कि वह लोग गन्ने की खेती कर पछता रहे हैं। वर्तमान समय में गन्ने का रकबा काफी कम हो गया है और अगले वर्ष गन्ने का रकबा नाम मात्र का ही रह जाएगा।
गौरतलब है कि तमाम कोर्ट के आदेश और प्रशासनिक सख्ती के बाद भी मिल मालिक किसानों के गन्ने का भुगतान करने में हीलाहवाली कर रहे हैं। भुगतान नहीं होने के चलते मिल प्रबंधकों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन साठगांठ के चलते किसी की गिरफ्तारी नहीं की जा सकी है। पुलिस मिलों में जाकर वापस आ जाती है और कह देती है कि छापेमारी के दौरान नामजद अधिकारी नहीं मिले, जबकि दो दिन पूर्व एक मिल में सभी अधिकारी मौजूद थे और उन्होंने एक कार्यक्रम में भाग भी लिया था।
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प्रशासन ने मिलों की मशीनरी और शीरा आदि नीलाम करने की तिथि घोषित की, लेकिन प्रचार के अभाव में नीलामी नहीं हो सकी। अब भूमि की नीलामी की तिथि घोषित की गई है। समझा जाता है कि भूमि की नीलामी में खरीददार पहुुंचेंगे, इससे मिल प्रबंधकों में हड़कंप है और नीलामी को टालने के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। सीज चीनी को बेचने की अनुमति के बाद भी क्षेत्र की मकसूदापुर चीनी मिल ने मात्र जनवरी तक खरीदे गन्ने का ही भुगतान किया है, जबकि सहकारी क्षेत्र की पुवायां चीनी मिल पर 15.30 करोड़ रुपये बकाया हैं।


बजाज चीनी मिल ने भेजा
एक फरवरी तक का भुगतान
- 13.59 करोड़ रुपया किसानों के खाते में भेजा
अमर उजाला ब्यूरो
मकसूदापुर/बंडा। बजाज चीनी मिल मकसूदापुर ने एक फरवरी तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान किसानों के खाते में भेज दिया है। समझा जाता है कि प्रशासन की सख्ती के चलते भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।
मिल के सहायक प्रबंधक (गन्ना) बब्बन सिंह ने बताया कि प्रशासन ने चार जुलाई को चीनी बेचने की अनुमति दी थी। चीनी बिक्री से प्राप्त समस्त राशि राशि 13 करोड़ 59 लाख 18 हजार रुपये का भुगतान गन्ना मूल्य मद में कर दिया गया है। गन्ना आयुक्त लखनऊ की ओर से वसूली प्रमाणपत्र जारी होने के बाद से मिल की ओर से 24 करोड़ 18 लाख 12 हजार रुपये का भुगतान किया जा चुका है। अब चीनी मिल पर गन्ने की देनदारी 6258.43 लाख रुपये रह गई है।


जल्द होगा किसानों को भुगतान
शासन ने प्रदेश की 24 चीनी मिलों को चार सौ करोड़ रुपये जारी किया है। पुवायां मिल के हिस्से में जो भी राशि आएगी उससे बकाया गन्ना भुगतान जल्द ही किया जाएगा। संभावना है कि 30 मार्च तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान हो जाएगा।
- एएस पोरस जीएम सहकारी चीनी मिल पुवायां



हर तरफ से किसान परेशान
एक तरफ किसानों के गन्ने का भुगतान नहीं दिया जा रहा है, दूसरी ओर मिल मालिक आगामी सीजन में मिल नहीं चलाने की धमकी दे रहे हैं। ऐसे में सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए और मिलों को जप्त कर खुद चलवाना चाहिए।
- संतराम निवासी गांव दीवाली, पुवायां




कबाड़ में बिकेगी मशीनरी
मिल नहीं चलेगी तो करोड़ों की मशीनरी में जंग लग जाएगी और इसे कबाड़ में बेचना पड़ेगा। मिल मालिकों की गीदड़ भभकी में नहीं आकर कड़ाई से गन्ने का राशि वसूली जानी चाहिए। मिलें नहीं चलेंगी तो मिल प्रबंधक और कर्मचारी भी भूखों मरने लगेंगे।
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- रतीराम निवासी गांव भूरखेड़ा, पुवायां



ब्याज सहित मिले भुगतान
धान लगाने के लिए किसानों को साहूकारों से कर्ज लेकर काम चलाना पड़ रहा है। मिल मालिकों से ब्याज सहित वसूली की जानी चाहिए। चीनी की खुले बाजार में बोली होनी चाहिए और किसानों को भुगतान किया जाना चाहिए।
- अरुण वर्मा, निवासी टकेली, पुवायां
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