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महंगाई ने बिगाड़ा भोजन थाल का स्वाद

Wed, 25 Jun 2014 05:33 AM IST
Shahjahanpur
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0 आलू-प्याज समेत मसालों के चढ़े दाम
0 आटा-चावल स्थिर होने से थोड़ी राहत
शाहजहांपुर। केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार के भले ही अच्छे दिन आ गए हों, आम आदमी को खाद्य वस्तुओं पर छा रही महंगाई एक माह के अंदर बुरे वक्त का अहसास कराने लगी है। आटा-चावल के खुदरा भाव स्थिर होने से गरीब तबके को थोड़ी राहत है, लेकिन आलू-प्याज समेत मसालों के दाम उछलने से मध्यवर्गीय परिवारों के भोजन थाल का स्वाद बिगड़ने लगा है।
रोजा की थोक मंडी से लेकर शहर की खुदरा मंडियों तक महंगाई का असर देखने को मिला। दस ठिकानों पर आलू-प्याज के भाव पता करने के बाद ही लोग इन चीजों की खरीददारी कर रहे हैं। आलू-प्याज का मोल-भाव इसलिए और बढ़ गया कि लोग-बाग कहीं न कहीं कम रेट पर यह चीजें मिलने की उम्मीद लगाए हैं।
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बिजली ने चढ़ा दिए आलू केदाम
पहाड़ से नए आलू की आवक हाल ही में शुरू हुई। इसलिए उसके ड्यौढ़े दाम ने लोगों की नए आलू से दूरी बढ़ा दी है। मजबूरी यह कि आलू के बगैर सब्जी की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए पुराना आलू भी तेवर दिखा रहा है। एक माह में प्रति किलो चार रुपये उछल चुका आलू का भाव एक सप्ताह से स्थिर है। रोजा मंडी के रमेश खंडेलवाल के अनुसार बिजली की दरें बढ़ने से कोल्ड स्टोरेज का किराया भी बढ़ गया और इसी वजह से आलू आंखें तरेर रहा है।
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कम आवक से रुलाने लगा प्याज
रोजा मंडी में प्याज की आवक नासिक (महाराष्ट्र) से होती है, लेकिन अभी वहां के प्याज की आवक शुरू नहीं हुई है। फिलहाल, स्थानीय प्याज यहां केबाजारों में खप रहा है। एक माह में प्याज का फुटकर भाव चार रुपये किलो बढ़ चुका है। इसकी देखा-देखी लहसुन भी दस रुपये बढ़कर 40 रुपये किलो हो गया।
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बारिश की कमी से सब्जियां बौराईं
बारिश कम होने बाजारों में हरी सब्जियां भी बौराने लगी हैं। एक माह से टिंडा 40 रुपये किलो से नीचे नहीं आ रहा और अब उसकी क्वालिटी भी खराब हो रही है। ऊंचे दाम केचलते परवल 15 रुपये के ढाई सौ ग्राम की आवाज पर बिक रहा है। ज्यादा खपत वाली तोरई, लौकी, टमाटर, भिंडी, करेला जैसी फसलें भी गरीब तबके की जेब ढीली कर रही हैं।
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चावल और दालें ग्राहकों को दे रहीं राहत
गल्ला मंडी के ग्राहकों को टटोला तो चावल और दालों के स्थिर दाम उन्हें राहत देते लगे। व्यापारियों के अनुसार एक माह में दालों की आवक बढ़ने से दाम दस-15 प्रतिशत तक घट गए हैं। आटा 20 रुपये से ऊपर नहीं गया। इसी तरह मध्यवर्गीय घरों में खपने वाला इंद्रासन और मंसूरी चावल भी 22 से 24 रुपये किलो पर टिका है।
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तेल-घी गिरे, मसालों पर महंगाई
एक माह के मोदी राज में वनस्पति घी, सरसों तेल और रिफाइंड के भाव प्रति किलो दो से सात रुपये गिरे, लेकिन मसालों पर मंहगाई का तड़का लग गया। काली मिर्च रिकार्ड सौ प्रतिशत उछाल लेकर 800 रुपये किलो पर जा चढ़ी है। इसी तरह धनिया पर दस रुपये और मेथी-जीरा पर 20 रुपये बढ़ चुके हैं।
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स्वाद से करना पड़ेगा समझौता
‘सब्जियां खासकर दुनिया भर में मशहूर इंडियन करी में चिकनाई की भरपूर खपत होती है, लेकिन उसी अनुपात में मसाले भी खपते हैं। मसालों की महंगाई अभी क्रय शक्ति से बाहर नहीं हुई, लेकिन दाम इसी तरह चढ़े तो लोगों को स्वाद से समझौता करना होगा।’
-विनय गुप्ता, किराना व्यापारी, बहादुरगंज
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महंगी सब्जियों का विकल्प बनीं दालें
‘सब्जियां भले ही महंगी हों, दालों केदाम घटने से लोगों को सब्जी की कटोरी हटाने में कठिनाई नहीं हो रही। अरहर-उड़द एक माह में पांच से दस रुपये गिरी जबकि मूंग 15 रुपये सस्ती हो गई। दालों की मांग भी बढ़ गई है।’
-अरविंद वर्मा, दाल व्यापारी, बहादुरगंज
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इंद्रासन और मंसूरी सबकी पसंद
‘सीजन कोई भी हो, इंद्रासन और मंसूरी चावल इलाके में सबसे ज्यादा खपता है। इसीलिए दोनों की डिमांड साल भर बनी रहती है। इनके दाम भी पिछले दो माह से स्थिर हैं। गल्ला मंडी में ग्राहकों का महंगाई महसूस नहीं हो रही।’
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-मोहम्मद जावेद, चावल व्यवसायी, बहादुरगंज गल्ला मंडी
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आवक की कमी से उछला प्याज
‘इन दिनों इतना महंगा प्याज इससे पहले कभी नहीं बेंचा। लोग लेने इसलिए आ रहे कि प्याज से सब्जी का जायका खुल जाता है। हालांकि, बहुतेरे लोग प्याज नहीं खाते फिर भी डिमांड में कोई कमी नहीं आई। अच्छी क्वालिटी का प्याज 25 से नीचे नहीं मिलेगा।’
-कुंज बिहारी, प्याज विक्रेता, बहादुरगंज
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